CWG 2026: करीब 40 दिन पहले तक भारतीय मुक्केबाज जैसमीन लंबोरिया अस्पताल के बिस्तर पर थी. लगातार तेज बुखार और पेट की बीमारी के कारण उन्हें भर्ती होना पड़ा था. जिसके कारण कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके खेलने पर भी सवाल खड़े हो गए थे. लेकिन शनिवार को ग्लास्गो में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मौजूदा चैंपियन माइकेला वॉल्श को हराकर महिलाओं के 57 किलोग्राम भार में गोल्ड अपने नाम किया.
भिवानी की 24 वर्षीय जैसमीन के लिए यह सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं था, बल्कि महीनों की बीमारी, दर्द और संघर्ष पर मिली यह जीत थी. उन्होंने चार साल पहले बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते ब्रॉन्ज मेडल को इस बार गोल्ड में बदल दिया.
एशियाई चैंपियनशिप से शुरू हुई मुश्किलें
जैसमीन की परेशानी मार्च में एशियाई चैंपियनशिप के दौरान शुरू हुई. पहले मुकाबले के बाद ही उन्हें तेज बुखार हो गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. खराब तबीयत के बावजूद लगातार तीन कठिन मुकाबले खेले, फाइनल में पहुंची और रजत पदक जीतने के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सीधे क्वालिफाई किया.
पहला मुकाबला खेलने के बाद ही मुझे तेज बुखार हो गया था. मेरी हालत काफी खराब थी. किसी तरह मैं सेमीफाइनल तक पहुंची, जहां मैंने बेहद कठिन मुकाबले में 3-2 से जीत दर्ज की. वे तीनों मुकाबले मेरे लिए बेहद कठिन रहे, लेकिन मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया था.
सिर में चोट लगने के बाद बीमार हुई जैसमीन
एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल के दौरान उनके सिर पर जोरदार चोट लगी, जिससे उन्हें कनकशन हो गया. जांच में कोई गंभीर समस्या नहीं मिली, लेकिन भारत लौटने के कुछ दिन बाद वह फिर बीमार पड़ गईं.
मैंने करीब 20 दिन अभ्यास किया, लेकिन फिर तेज बुखार हो गया. हालत इतनी खराब हो गई कि अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. लंबे समय तक दवाइयां लेनी पड़ीं. मुझे नहीं पता यह कैसी बीमारी थी. बस यही उम्मीद थी कि मैं जल्द पूरी तरह ठीक हो जाऊं.
बीमारी के कारण जैसमीन जून में चेक गणराज्य में आयोजित भारतीय टीम के एक्सपोजर कैंप में भी हिस्सा नहीं ले सकीं. इससे कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी बुरी तरह प्रभावित हुई.
सिर्फ एक महीने की तैयारी
लगातार बीमारी और लंबे ब्रेक का असर उनके आत्मविश्वास पर भी पड़ा. उन्होंने स्वीकार किया कि उनके मन में कई नकारात्मक विचार आने लगे थे. इसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट के साथ काम किया, जिसने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद की.
मैंने खेल मनोवैज्ञानिक के साथ काम किया. उन्होंने लगातार मेरा हौसला बढ़ाया. कोचों ने मुझसे कहा कि धीरे-धीरे फिटनेस हासिल करो और नतीजे की चिंता मत करो. सिर्फ अपना आत्मविश्वास बनाए रखो. उसके बाद मैंने आत्मविश्वास बनाए रखा. मेडल जीतने के बाद मैं बहुत खुश हूं. मैं यहां अपने पदक का रंग बदलने और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ आई थी.
रिंग में दिखाई चैंपियन वाली जिद
ग्लास्गो पहुंचने तक बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि जैसमीन हाल ही में गंभीर बीमारी से उबरकर लौटी हैं. लेकिन रिंग में उतरते ही उन्होंने अपने खेल से साबित कर दिया कि वह क्यों मौजूदा विश्व चैंपियन हैं. फाइनल में उन्होंने माइकेला वॉल्श को हराकर भारत के नाम एक और स्वर्ण पदक कर दिया. 40 दिन पहले अस्पताल के बिस्तर पर लेटी जैसमीन ने शायद ही सोचा होगा कि कुछ ही हफ्तों बाद वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर भारत का तिरंगा सबसे ऊपर लहराते हुए स्वर्ण पदक गले में पहनेंगी.
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