Ishant Sharma Toughest Phase Story: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज इशांत शर्मा के करियर में कई शानदार पल रहे हैं, लेकिन एक ऐसा दौर भी आया था जब एक मैच ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था. साल 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में जेम्स फॉकनर के एक ओवर में 30 रन लुटाने के बाद इशांत शर्मा मानसिक तौर पर बुरी तरह प्रभावित हुए थे. उन्होंने बताया कि वह इस घटना के बाद करीब 15 दिनों तक परेशान रहे और अपनी पत्नी को फोन करके रोते थे.
जब भारत जीत के बेहद करीब था
19 अक्टूबर 2013 को मोहाली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे मुकाबला खेला गया था. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए महेंद्र सिंह धोनी के शानदार 139 रन की मदद से 303 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया की पारी में एक समय ऐसा आया जब भारतीय टीम जीत की तरफ बढ़ती दिख रही थी.
मेहमान टीम को आखिरी तीन ओवर में 44 रन की जरूरत थी. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 48वें ओवर के लिए गेंद इशांत शर्मा को थमाई. सामने ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर जेम्स फॉकनर थे. इसके बाद जो हुआ, वह भारतीय क्रिकेट फैंस शायद ही भूल पाएं.
फॉकनर ने एक ओवर में कूट दिए 30 रन
इशांत के उस ओवर में फॉकनर ने चौका और छक्कों की बरसात कर दी. उन्होंने ओवर में 4, 6, 6, 2, 6, 6 रन बनाए. यानी एक ही ओवर में 30 रन. ओवर शुरू होने से पहले ऑस्ट्रेलिया को 18 गेंदों में 44 रन चाहिए थे. लेकिन छह गेंदों के बाद समीकरण पूरी तरह बदल चुका था और ऑस्ट्रेलिया को 12 गेंदों में सिर्फ 14 रन चाहिए थे.
फॉकनर ने इसके बाद भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी और 29 गेंदों पर नाबाद 64 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को चार विकेट से जीत दिला दी. इशांत के लिए यह सिर्फ एक मैच की हार नहीं थी. उन्हें लग रहा था कि उनकी वजह से भारत मैच हार गया. जिसके बाद वो कुछ दिन से इस सदमे से उबर नहीं पाए.
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‘मैं अपनी बीवी को कॉल करके रोता था’
न्यूज18 के खास शो ‘जज्बा’ में अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर के बारे में बात करते हुए इशांत शर्मा ने बताया कि वह उस समय मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए थे. उनके दिमाग में बार-बार वही ओवर और फॉकनर की बल्लेबाजी घूमती रहती थी.
इशांत ने बताया कि वह अपनी पत्नी को फोन करके रोया करते थे. उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद करीब 15 दिनों तक वह इस सदमे से बाहर नहीं निकल पाए. इस घटना के बाद उस समय उनकी मंगेतर और अब पत्नी प्रतिमा सिंह ने उन्हें इस मुश्किल दौर से बाहर निकालने में काफी मदद की.
प्रतिमा खुद भी खेल से जुड़ी रही हैं और खेल के दबाव को समझती थीं. उन्होंने इंशात को समझाया कि क्रिकेट जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा है. एक मैच या एक खराब प्रदर्शन पूरी जिंदगी तय नहीं कर सकता. उन्होंने अपनी गलतियों पर काम करने और दोबारा मैदान पर लौटने का फैसला किया.
जिस ओवर को भूलना चाहते थे, वही बना टर्निंग पॉइंट
इशांत ने बाद में बताया कि 2013 की उस घटना के बाद उन्होंने क्रिकेट को और गंभीरता से लेना शुरू किया. उन्होंने अपनी गेंदबाजी में बदलाव किए और अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेना सीखा. इसके बाद इशांत ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई. वह भारत के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाजों में शामिल हुए और 100 से ज्यादा टेस्ट खेलने वाले भारतीय खिलाड़ियों में जगह बनाई.
