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IPL 2020: मैन ऑफ द मैच पाकर रातों-रात सुर्खियों में आये राहुल त्रिपाठी, शाहरुख खान बोले-राहुल, नाम तो सुना ही होगा...रांची से है ये कनेक्शन

By Prabhat Khabar Print Desk
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Rahul tripathi
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prabhat khabar

IPL 2020 : बहुत कम लोगों को पता है कि आइपीएल में बुधवार को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी कर लाइमलाइट में आनेवाले कोलकाता नाइटराइडर्स के युवा बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी का रांची से भी नाता रहा है. दरअसल राहुल का जन्म दो मार्च 1991 में रांची के रामा नर्सिंग होम में हुआ है. उनका बचपन रांची में ही गुजरा. रांची के नगड़ा टोली में राहुल का ननिहाल है. उनके मामा मधुकांत त्रिपाठी ने बताया कि राहुल की प्रारंभिक शिक्षा लालपुर (रांची) स्थित ईस्ट प्वॉइंट स्कूल से हुई है.

जब वह 10 साल के थे, तब उनके पिता का ट्रांसफर हो गया. उनके पिता कर्नल अजय त्रिपाठी सेना में हैं और वर्तमान में पुणे में पदस्थापित हैं. रांची में रहते हुए वह दीपाटोली में पदस्थापित थे. उनकी माता सरोज त्रिपाठी गृहिणी हैं और छोटी बहन रॉली त्रिपाठी बास्केटबॉल प्लेयर है.

राहुल त्रिपाठी ने 2017 में पुणे की ओर से किया था शानदार प्रदर्शन

सत्र मैच नाबाद रन उच्च औसत स्ट्राइक रेट शतक अर्धशतक चौका छक्का

2020 2 0 117 81 58.50 174.62 0 1 11 6

2019 8 1 141 50 23.50 119.49 0 1 13 2

2018 12 3 226 80* 25.11 135.32 0 1 18 8

2017 14 0 391 93 27.92 146.44 0 2 43 17

ओवरऑल 36 4 875 93 28.22 141.35 0 5 85 33

खास बातें :-

  • 2017 में राइजिंग पुणे की ओर से पदार्पण किया

  • 2018 व 2019 में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेले

  • 2020 में केकेआर ने 60 लाख में खरीदा, 2018 में 3.4 करोड़ में बिके थे

शाहरुख हुए फिदा, कहा- नाम बहुत सुना था, काम उससे भी उम्दा है : केकेआर की जीत में सबसे अहम रोल ओपनर राहुल त्रिपाठी का रहा. त्रिपाठी ने 51 गेंद पर 81 रन बनाये. इसमें 8 चौके और 3 छक्के शामिल थे. उन्हें मैन ऑफ मैच भी चुना गया. केकेआर के जीत के बाद शाहरुख खान ने टीम और राहुल त्रिपाठी की इनिंग की तारीफ की. खान ने कहा- रन थोड़े कम थे, लेकिन आखिर में गेंदबाजों ने कमाल दिखा दिया. राहुल त्रिपाठी का नाम तो सुना था, काम उससे भी कमाल है. सब स्वस्थ रहें. जल्द मुलाकात होगी.

सिर्फ 9 महीने की उम्र में हाथ में थामा बल्ला : उनके मामा ने बताया कि राहुल जब नौ महीने के थे, तभी उन्होंने प्लास्टिक के बैट से खेलना शुरू कर दिया था. उन्हें दूसरे खिलौने कभी पसंद नहीं थे. थोड़ा बड़े होने पर राहुल अक्सर पेंसिल को विकेट, स्केल को बैट और रबर को बॉल बना कर खेला करते थे. उनके पिता जब गैंगटोक में पोस्टेड थे, तब उन्हें हिल एरिया में क्वार्टर मिला था. वहां राहुल ने क्रिकेट प्रैक्टिस के चक्कर में तकरीबन 500 बॉल्स खो दी.

इंजीनियर बनना चाहते थे राहुल : राहुल के मामा ने बताया कि खेल के साथ-साथ राहुल पढ़ाई में भी हमेशा अव्वल रहे हैं. क्लास में हमेशा टॉप 5 में उनकी रैंक रही. राहुल मैथ्स में बहुत अच्छे हैं. इसमें उन्हें हमेशा 90 परसेंट से ऊपर मार्क्स आते रहे. क्रिकेटर के अलावा वे इंजीनियर बनना चाहते थे.

2003 में हुआ महाराष्ट्र टीम में चयन : राहुल का चयन 2003 में महाराष्ट्र टीम में हुए. तब वह मात्र 12 साल के थे. करीब 2000 क्रिकेटरों में से उन्होंने टॉप 80 में जगह बमायी. 2014 में सीके नायडू क्रिकेट में उन्होंने चार शतक बनाये. उनके प्रदर्शन की बदौलत महाराष्ट्र की टीम फाइनल में पहुंची. फाइनल में 282 रन की पारी खेल राहुल ने अपनी टीम को चैंपियन बनाया.

Posted by : pritish sahay

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