ब्रिस्बेन : विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में भारतीय गेंदबाजों की लचर प्रदर्शन के लिये फिर से कडी आलोचना करते हुए पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने आज कहा कि गेंदबाज पिछले विदेशी दौरों के अनुभव से कुछ भी नहीं सीख रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में एक मैच में 20 विकेट लेने में नाकाम रहने के बाद भारतीय गेंदबाज त्रिकोणीय श्रृंखला के शुरुआती मैच में 267 रन के लक्ष्य का बचाव करने में नाकाम रहे और गावस्कर उनसे प्रभावित नहीं दिखे.
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि समस्या यह है कि भारतीय गेंदबाजों ने सीमित ओवरों की क्रिकेट में अपने पिछले विदेशी दौरों के अनुभव से कुछ नहीं सीखा है. इसलिए यह चिंता की बात है. हम यही उम्मीद कर रहे हैं कि जब विश्व कप शुरु होगा तब मौजूदा चैंपियन होना उनके लिये प्रेरणादायी साबित होगा.
गावस्कर ने एनडीटीवी से कहा, अभी मुझे ऐसा लग रहा है कि शायद गेंदबाजी भी खुद अच्छी गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं. वे लंबे समय से दौरे पर हैं. उन्होंने टेस्ट श्रृंखला खेली और वे खुद को ऐसी स्थिति में नहीं डालना चाहते हैं कि विश्व कप से पहले वे किसी तरह से चोटिल हो जाएं.
लेकिन एक सच्चे आशावादी की तरह गावस्कर को अब भी उम्मीद है कि महेंद्र सिंह धौनी और उनकी टीम इंग्लैंड में अपने प्रदर्शन से प्रेरणा लेकर विश्व कप में अपनी छाप छोडेगी. उन्होंने कहा, उन्होंने इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन किया था. इसलिए मुझे उम्मीद है कि वे फिर से उसी तरह की लय हासिल करेंगे जैसे कि उन्होंने इंग्लैंड में पायी थी और 4-1 से श्रृंखला जीती थी. यदि ऐसा होता है तो फिर भारत मजबूत टीम होगी. गावस्कर ने भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी से उम्मीद जतायी कि वे समय आने पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे.
उन्होंने कहा, मेरी पहली पसंद के गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी होंगे. मैं इन दोनों को टीम में रखूंगा. मैं स्टुअर्ट बिन्नी को भी टीम में रखूंगा और दो स्पिनरों का भी चयन करुंगा. इसका कारण यह है कि भुवनेश्वर थोडी बल्लेबाजी भी कर सकता है और वह बहुत अच्छा क्षेत्ररक्षक भी है. शमी भी कुछ समय क्रीज पर बिता सकता है और वह भी बहुत अच्छा क्षेत्ररक्षक है.
बिन्नी और दो स्पिनरों के होने से टीम में सभी खिलाड़ी ऐसे होंगे जो बल्लेबाजी कर सकते हैं. इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, इसलिए मैं ऐसी टीम चाहता हूं जिसमें आखिर तक बल्लेबाज हों. आपको जिन पिचों पर खेलना है वहां पर बल्लेबाज घुटने भी टेक सकते हैं जैसे कि गाबा में हुआ.
