भारत-पाकिस्तान मैच से क्यों गायब हो रही है खेल भावना?
लंदन : कल चैंपियंस ट्रॉफी 2017 का फाइनल मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जायेगा. भारत और पाकिस्तान के बीच खिताबी जंग को देखते हुए क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि जब भी भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने होती है तो रोमांच चरम पर होता […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
लंदन : कल चैंपियंस ट्रॉफी 2017 का फाइनल मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जायेगा. भारत और पाकिस्तान के बीच खिताबी जंग को देखते हुए क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि जब भी भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने होती है तो रोमांच चरम पर होता है. मैदान पर आक्रामकता होती है और दर्शकों का दबाव कुछ ऐसा होता है कि खिलाड़ी क्लास की क्रिकेट दिखाते हैं. लेकिन विगत कुछ वर्षों से देखा यह जा रहा है कि क्रिकेट पर दोनों देशों के संबंध हावी हो जाते हैं और खेल का मैदान युद्ध का मैदान सा प्रतीत होने लगता है.
सोशल मीडिया पर टिप्पणी की बाढ़
लीग मैच में तो भारत पाकिस्तान की भिड़ंत हुई ही, अब जब से यह तय हुआ है कि भारत और पाकिस्तान फाइनल में भी आमने-सामने होंगे, ट्वीट की बाढ़ आ गयी है. कोई यह कहने में व्यस्त है कि ‘फादर्स डे’ पर बाप बेटे का मुकाबला, तो कोई यह लिख रहा है कि पाकिस्तानी जन्नत के लिए जान दे देंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि पाकिस्तान जहन्नुम है और भारत स्वर्ग है. भारत-पाकिस्तान मैच कल : संभावनाओंं और रणनीति पर देखें प्रभात खबर के वरिष्ठ संपादक अनुज सिन्हा की टिप्पणी
कमेंटरी में भी दिखती है आक्रामकता
जब भी भारत और पाकिस्तान का मुकाबला होता कमेंटरी बॉक्स में भी तल्खी दिखती है. हालांकि खिलाड़ी माहौल को हल्का भी कर लेते हैं, लेकिन जिस तरह की टिप्पणी होती है, उसे सही नहीं कहा जा सकता. हालांकि जानकारों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक संबंध जिस तरह के हैं, उसका असर खेल के मैदान पर दिखना स्वाभाविक है. लेकिन यह प्रयास किया जाना चाहिए कि खेल भावना बनी रहे, क्योंकि खेल के मैदान पर यही सर्वोपरि है.