Age Fraud in Sports: एशियन गेम्स 2026 से पहले भारतीय खेलों के सामने सिर्फ पदक जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है, जो देश के भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करता है. जूनियर स्तर पर उम्र फर्जीवाड़ा लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है.
हाल ही में गोंडा की U-17 कुश्ती प्रतियोगिता में 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को उम्र और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी के बाद बाहर किया गया. अब खेल मंत्रालय के प्रस्तावित नए सिस्टम में जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड और पहचान दस्तावेजों को जोड़कर खिलाड़ी की उम्र का एक वेरिफाइड केंद्रीय रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है.
500 से ज्यादा खिलाड़ियों ने खोली पोल
जून 2026 में गोंडा में हुए U-17 नेशनल ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट में करीब 1,200 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था. उम्र और पहचान की जांच के दौरान 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को बाहर कर दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड में दर्ज जानकारी में अंतर मिला.
यह मामला बताता है कि उम्र फर्जीवाड़ा किसी एक खिलाड़ी या खेल तक सीमित समस्या नहीं है. इसका सबसे ज्यादा असर जूनियर और सब-जूनियर प्रतियोगिताओं में पड़ता है. कम उम्र दिखाकर अधिक उम्र का खिलाड़ी ऐसी प्रतियोगिताओं में शारीरिक बढ़त हासिल कर सकता है. इससे वास्तविक उम्र वाले खिलाड़ियों के चयन और करियर पर सीधा असर पड़ता है.
उम्र फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा नुकसान
- वास्तविक उम्र वाले खिलाड़ियों को चयन में नुकसान
- छात्रवृत्ति और सरकारी सहायता पर असर
- जूनियर प्रतियोगिताओं की विश्वसनीयता पर सवाल
- प्रतिभा पहचान प्रणाली में गड़बड़ी
- खिलाड़ियों के भविष्य और करियर पर असर
जन्म प्रमाणपत्र से खेल रिकॉर्ड तक कहां टूटती है कड़ी?
एक खिलाड़ी की जन्मतिथि कई जगह दर्ज होती है. जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, आधार या अन्य पहचान दस्तावेज, राज्य संघ और राष्ट्रीय महासंघ के रिकॉर्ड में एक ही जानकारी होनी चाहिए. लेकिन इन रिकॉर्ड के बीच डिजिटल तालमेल हमेशा मजबूत नहीं रहा है. यही वजह है कि खेल मंत्रालय के प्रस्तावित नेशनल कोड अगेंस्ट एज फ्रॉड इन स्पोर्ट्स (NCAAFS-2025) में कई दस्तावेजों के मिलान और वेरिफाइड उम्र का केंद्रीय डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की बात कही गई है.
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नया सिस्टम कैसे करेगा काम?
| रिकॉर्ड | प्रस्तावित भूमिका |
| जन्म प्रमाणपत्र | मूल जन्म रिकॉर्ड |
| Aadhaar/APAAR | पहचान की पुष्टि |
| स्कूल प्रमाणपत्र | जन्मतिथि का दूसरा स्रोत |
| मेडिकल टेस्ट | रिकॉर्ड में अंतर होने पर जांच |
| National Athlete Database | सत्यापित उम्र का केंद्रीय रिकॉर्ड |
प्रस्ताव के मुताबिक, खिलाड़ी के दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि का मिलान किया जाएगा. अगर रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो खिलाड़ी को मेडिकल जांच के लिए भेजा जा सकता है. वेरिफाइड उम्र को केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में सुरक्षित करने और उसे लॉक करने का भी प्रस्ताव है. इसका मकसद यह है कि खिलाड़ी अलग-अलग प्रतियोगिताओं में अलग जन्मतिथि देकर उम्र में हेरफेर न कर सके.
BCCI और दूसरे फेडरेशन में कितना अंतर?
उम्र सत्यापन के मामले में अलग-अलग खेल महासंघों की प्रक्रिया अलग रही है. क्रिकेट में BCCI जूनियर स्तर पर TW3 आधारित उम्र सत्यापन का इस्तेमाल करता रहा है. फुटबॉल और कुश्ती में भी दस्तावेजों के साथ मेडिकल जांच का इस्तेमाल किया जाता है.
| खेल/व्यवस्था | उम्र सत्यापन का तरीका |
| क्रिकेट | दस्तावेज + TW3 टेस्ट |
| फुटबॉल | जन्म प्रमाणपत्र + दस्तावेज/उम्र परीक्षण |
| कुश्ती | Birth Certificate + Aadhaar verification |
| प्रस्तावित राष्ट्रीय सिस्टम | सभी जरूरी रिकॉर्ड का केंद्रीय मिलान |
हालांकि मेडिकल ऐज टेस्ट को जन्मतिथि का बिल्कुल सटीक विकल्प नहीं माना जा सकता. इसलिए दस्तावेजी रिकॉर्ड और मेडिकल जांच को साथ देखकर फैसला करना जरूरी होगा.
National Athlete Database से क्या बदलेगा?
प्रस्तावित सिस्टम में खिलाड़ी की वेरिफाइड उम्र को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में सुरक्षित करने की योजना है. इससे हर प्रतियोगिता में नए सिरे से उम्र का रिकॉर्ड देने की जरूरत कम होगी और जन्मतिथि बदलने की गुंजाइश भी घटेगी. लेकिन इस सिस्टम के सामने एक बड़ी चुनौती भी है. अगर शुरुआत में ही गलत जन्मतिथि दर्ज है, तो डिजिटल सिस्टम उस गलत जानकारी को भी सुरक्षित कर सकता है. इसलिए केवल डेटाबेस बनाना पर्याप्त नहीं होगा. पहली बार दर्ज होने वाले रिकॉर्ड का सत्यापन सबसे अहम होगा.
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सिस्टम को सफल बनाने के लिए जरूरी 4 चीजें
- जन्म रिकॉर्ड का मजबूत सत्यापन
- सभी खेल महासंघों के लिए एक समान नियम
- गलत फैसले के खिलाफ अपील की सुविधा
- नाबालिग खिलाड़ियों के डेटा की सुरक्षा
बच्चों के डेटा की प्राइवेसी भी बड़ी चुनौती
नेशनल एथलीट डेटाबेस में जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड और मेडिकल जानकारी जुड़ने से खिलाड़ियों, खासकर नाबालिगों के पर्सनल डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण होगी. प्रस्तावित कोड में बच्चों के डेटा को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के अनुरूप सुरक्षित रखने की बात कही गई है. साथ ही यह भी जरूरी होगा कि दस्तावेज में हुई वास्तविक गलती और जानबूझकर किए गए उम्र फर्जीवाड़े के बीच अंतर किया जाए.
Asian Games 2026: भारत का कितना बड़ा दल?
| जानकारी | आंकड़ा |
| आयोजन | 19 सितंबर–4 अक्टूबर |
| मेजबान | आइची-नागोया, जापान |
| भारत का दल | 492 खिलाड़ी |
| पुरुष खिलाड़ी | 265 |
| महिला खिलाड़ी | 227 |
| सबसे बड़ा भारतीय दल | एथलेटिक्स – 73 |
भारत ने पिछले एशियन गेम्स में 107 पदक जीते थे. इस बार भी उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. हालांकि उम्र फर्जीवाड़े की समस्या मुख्य रूप से जूनियर और सब-जूनियर स्तर पर है, लेकिन भविष्य के एशियन गेम्स और ओलंपिक खिलाड़ियों की पहली पहचान इन्हीं प्रतियोगिताओं से होती है. इसलिए शुरुआती स्तर पर खिलाड़ी का सही रिकॉर्ड पूरे खेल सिस्टम की विश्वसनीयता के लिए बेहद जरूरी है.
क्या उम्र फर्जीवाड़ा पूरी तरह खत्म होगा?
नया सिस्टम उम्र फर्जीवाड़े को कम और मुश्किल जरूर कर सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए जन्म पंजीकरण, स्कूल रिकॉर्ड, पहचान दस्तावेज और खेल महासंघों के डेटाबेस को सुरक्षित तरीके से जोड़ना होगा.
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