Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने को अत्यंत पवित्र और भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है. पूरे माह भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और शिव भक्ति का विशेष महत्व होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन का महीना भगवान शिव को ही इतना प्रिय क्यों माना जाता है? आखिर ऐसी कौन-सी मान्यताएं और पौराणिक कथाएं हैं, जो इस महीने को इतना खास बनाती हैं? आइए, इस लेख के माध्यम से सावन के धार्मिक महत्व को विस्तार से समझते हैं.
पौराणिक कथाएं
समुद्र मंथन और हलाहल विष का पान
सावन के महीने से जुड़ी सबसे प्रमुख कथा समुद्र मंथन की है. कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब उसमें से 14 रत्न निकले. लेकिन रत्नों से पहले 'हलाहल' नामक भयंकर विष प्रकट हुआ, जिसकी ज्वाला से पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया.
सृष्टि की रक्षा के लिए सभी देवता और असुर भगवान शिव की शरण में पहुंचे. तब महादेव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, जिसके कारण उन्हें 'नीलकंठ' कहा जाने लगा. विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव पर पवित्र नदियों का शीतल जल अर्पित किया. मान्यता है कि यह घटना सावन मास में ही हुई थी. इसलिए श्रद्धालु सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और उन्हें बेलपत्र अर्पित करते हैं.
माता पार्वती का कठोर तप और शिव-पार्वती का पुनर्मिलन
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्यागने के बाद माता सती ने हिमालय राज के घर माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया. भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने सावन के पूरे महीने निराहार रहकर कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी माह उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया. इसलिए सावन का महीना अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.
सावन में भगवान शिव का पृथ्वी लोक पर निवास
एक धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के महीने में भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा (चातुर्मास) में चले जाते हैं. इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं. यह भी कहा जाता है कि सावन में भगवान शिव अपनी ससुराल कनखल (हरिद्वार) आते हैं और पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं. इसलिए इस महीने में की गई पूजा-अर्चना और भक्तों की प्रार्थना सीधे महादेव तक पहुंचती है.
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