जून में कब रखा जाएगा स्कन्द षष्ठी व्रत? जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

Skanda Sashti: स्कन्द षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करने का विधान है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भय दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. यदि आप भी यह व्रत करने की सोच रहे हैं, तो जान लें कि जून माह में यह व्रत कब रखा जाएगा.

Skanda Sashti 2026: स्कन्द षष्ठी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है. यह भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय को समर्पित है. यह व्रत प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं.

जून 2026 में स्कन्द षष्ठी की तिथि और शुभ समय

  • षष्ठी तिथि प्रारंभ: 19 जून 2026, शाम 5:00 बजे
  • षष्ठी तिथि समाप्त: 20 जून 2026, दोपहर 3:47 बजे
  • उदया तिथि के अनुसार स्कन्द षष्ठी व्रत: 20 जून 2026, शनिवार

स्कन्द षष्ठी की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. यदि भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा उपलब्ध न हो, तो शिव-पार्वती की पूजा के साथ उनका ध्यान करें.

भगवान कार्तिकेय को रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और हल्दी अर्पित करें. इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं. फिर उन्हें मिठाई और फलों का भोग लगाएं. स्कन्द षष्ठी व्रत कथा का पाठ करें तथा भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें. अंत में दीपक या कपूर से आरती कर पूजा संपन्न करें.

स्कन्द षष्ठी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान कार्तिकेय ने अत्याचारी राक्षस तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. इसलिए भगवान कार्तिकेय को देवसेनापति और युद्ध के देवता के रूप में भी पूजा जाता है. यह पर्व जीवन में बुराई पर अच्छाई की विजय तथा काम, क्रोध और लोभ जैसे आंतरिक विकारों पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से भय दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता प्राप्त होती है.

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Published by: Neha Kumari

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