Sawan Amavasya: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को श्रावण या हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. यह तिथि भगवान शिव की उपासना, पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण-श्राद्ध और प्रकृति संरक्षण (वृक्षारोपण) को समर्पित मानी जाती है. श्रावण अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान करने, अपनी क्षमता के अनुसार दान देने और पितरों का तर्पण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही, पितृ दोष एवं ग्रह दोष से संबंधित समस्याओं से भी राहत मिलती है.
श्रावण अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त
| शुभ कार्य | समय / मुहूर्त |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 12 अगस्त, तड़के 01:52 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 12 अगस्त, रात 11:06 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त (स्नान-ध्यान) | सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक |
| लाभ-उन्नति मुहूर्त | सुबह 07:20 बजे से 09:03 बजे तक |
| अमृत मुहूर्त | सुबह 09:03 बजे से 10:45 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त (दान व पूजन) | दोपहर 11:59 बजे से 12:52 बजे तक |
सावन अमावस्या पर करें इन चीजों का दान
- काले तिल और उड़द: पितृ दोष और शनि दोष से राहत पाने के लिए काले तिल और काली उड़द दाल का दान उत्तम माना जाता है.
- अन्न व वस्त्र: इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को गेहूं, चावल, गुड़ अथवा सात्विक भोजन कराएं और वस्त्र दान करें.
- छाता और जूते-चप्पल: इस दिन छाता, जूते या चप्पल दान करने का विशेष महत्व माना जाता है.
- दूध और शक्कर: मानसिक शांति और चंद्र ग्रह को मजबूत करने के लिए दूध या चावल की खीर का दान करना शुभ माना जाता है.
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