रामनवमी से पहले इन दिनों निकलेंगे मंगलवारी जुलूस, शहर में दिखेगा भक्ति का रंग

Ram Navami 2026: इस साल 27 मार्च को रामनवमी मनाई जाएगी. इससे पहले 10, 17 और 24 मार्च को मंगलवारी जुलूस निकलेंगे, जबकि 26 मार्च को महाअष्टमी की भव्य झांकी निकाली जाएगी.

राजकुमार लाल, रांची

Ram Navami 2026: इस साल रामनवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी. इस मौके पर शहर और मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे. राम भक्तों के लिए इस बार एक खास बात यह है कि रामनवमी से पहले लगातार तीन मंगलवारी जुलूस निकाले जाएंगे. इन जुलूसों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान राम के जयकारे लगाएंगे और भक्ति गीतों के साथ शहर में धार्मिक माहौल बनाएंगे.

तीन मंगलवारी जुलूस की तिथियां

रामनवमी से पहले हर मंगलवार को पारंपरिक मंगलवारी जुलूस निकाला जाता है. इस साल भी तीन अलग-अलग मंगलवार को यह जुलूस निकलेगा.

  • पहला मंगलवारी जुलूस 10 मार्च को निकलेगा.
  • दूसरा मंगलवारी जुलूस 17 मार्च को निकलेगा.
  • तीसरा मंगलवारी जुलूस 24 मार्च को निकलेगा.

इन जुलूसों में भगवान राम के भक्त ढोल-नगाड़ों, झंडों और भक्ति गीतों के साथ शामिल होते हैं. कई जगहों पर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की झांकियां भी सजाई जाती हैं. रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और जलपान की व्यवस्था भी की जाती है. इससे पूरे शहर में भक्तिमय माहौल बन जाता है.

26 मार्च को निकलेगी महाअष्टमी की झांकी

26 मार्च को महाअष्टमी के दिन भव्य झांकी निकाली जाएगी. इस दिन मंदिरों को खास तरीके से सजाया जाएगा. रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और आकर्षक सजावट से मंदिरों की सुंदरता और बढ़ जाएगी.

महाअष्टमी की झांकी देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों से निकलते हैं. कई जगहों पर मां दुर्गा की झांकियां, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.

27 मार्च को दोपहर तक रहेगी नवमी तिथि

पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, वाराणसी पंचांग के मुताबिक इस बार नवमी तिथि सुबह 5:56 बजे से शुरू होकर शाम 5:12 बजे तक रहेगी. यही वजह है कि 27 मार्च को ही रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा. रामनवमी के दिन दोपहर 12:02 बजे तक नवमी तिथि रहेगी. यह समय भगवान राम के जन्म का मध्याह्न काल माना जाता है. इसलिए इस समय पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान करना बहुत शुभ माना जाता है.

पुनर्वसु नक्षत्र का भी बनेगा खास संयोग

इस दिन एक और खास बात यह है कि पुनर्वसु नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम का जन्म भी पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था. ऐसे में जब नवमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग बनता है, तो रामनवमी का महत्व और भी बढ़ जाता है. इसी कारण इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और हवन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर भगवान राम का आशीर्वाद लेते हैं और रामनवमी का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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