Somnath Temple Amrit Mahotsav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में शामिल हुए. मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यहां भव्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. पीएम मोदी ने मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की और पारंपरिक विधि-विधान से आयोजित अनुष्ठानों में हिस्सा लिया. इस अवसर पर देशभर के श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं की मौजूदगी ने माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया.
महोत्सव के दौरान 11 पवित्र तीर्थस्थलों के जल से विशेष कुंभाभिषेकम किया गया. इसके लिए पांच फुट ऊंचे विशेष पात्र को क्रेन की सहायता से मंदिर के शिखर तक पहुंचाया गया, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया. समारोह को यादगार बनाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों ने आसमान में शानदार हवाई करतब भी दिखाए. वहीं गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने प्रधानमंत्री की यात्रा और कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की.
सोमनाथ मंदिर का पौराणिक महत्व
सोमनाथ मंदिर को हिंदू धर्म में पहला आदि ज्योतिर्लिंग माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहां चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था. मान्यता है कि दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों से विवाह करने के बाद भी चंद्रमा रोहिणी से विशेष प्रेम करते थे. इससे नाराज होकर दक्ष ने उन्हें श्राप दे दिया, जिसके कारण चंद्रमा का तेज कम होने लगा.
इसके बाद ब्रह्मा जी की सलाह पर चंद्रदेव प्रभास तीर्थ पहुंचे और भगवान शिव की आराधना की. उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्ति दी. तभी से यह स्थान श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
मंदिर निर्माण से जुड़ी मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले चंद्रदेव ने सोने से सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था. इसके बाद लंका के राजा रावण ने चांदी से मंदिर बनवाया. माना जाता है कि बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से इसका पुनर्निर्माण कराया. शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि त्रेता युग में इस ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी. तभी से यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है.
इतिहास में कई बार हुआ हमला
गुजरात के वेरावल बंदरगाह के पास स्थित इस मंदिर की ख्याति प्राचीन समय से ही दूर-दूर तक फैली हुई थी. इसकी समृद्धि और प्रसिद्धि के कारण कई आक्रमणकारियों ने इसे निशाना बनाया. इतिहासकारों के अनुसार 11वीं से 18वीं सदी के बीच मंदिर पर कई बार हमले हुए.
सबसे पहला हमला लगभग 1300 वर्ष पहले सिंध के सूबेदार अल जुनैद ने किया था. इसके बाद महमूद गजनवी ने मंदिर पर आक्रमण कर यहां की संपत्ति लूटी और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया. बाद में अलाउद्दीन खिलजी और मुगल शासक औरंगजेब ने भी मंदिर को क्षति पहुंचाई. हालांकि हर बार लोगों की अटूट आस्था और संकल्प ने सोमनाथ मंदिर को फिर से खड़ा कर दिया. यही कारण है कि आज भी यह मंदिर भारतीय संस्कृति, विश्वास और पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है.
