Pearl Gemstone Wearing Rules: रत्न शास्त्र में मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार यह मन को शांति, भावनात्मक मजबूती और मानसिक संतुलन प्रदान करता है. मोती धारण करने से व्यक्ति का गुस्सा नियंत्रित रहता है, फिजूलखर्ची कम होती है और मन सकारात्मक बना रहता है. लेकिन यदि इसे गलत रत्नों के साथ पहन लिया जाए तो लाभ की जगह गंभीर मानसिक अशांति और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए मोती पहनने से पहले उसके सही नियम और निषिद्ध संयोजनों को जानना बेहद जरूरी है.
मोती पहनने का सही तरीका
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मोती को सोमवार के दिन धारण करना सबसे शुभ माना गया है. इसे पहनने से पहले गंगाजल से शुद्ध करें और “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें. इसके बाद मोती को हाथ की कनिष्ठा यानी छोटी उंगली में धारण करना चाहिए. सही विधि से पहना गया मोती मानसिक शांति और सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है.
मोती के साथ भूलकर भी न पहनें ये रत्न
नीलम
मोती के साथ नीलम पहनना अशुभ माना गया है. इससे जीवन में अचानक समस्याएं बढ़ सकती हैं और मानसिक तनाव लगातार बना रहता है.
हीरा
मोती और हीरे का संयोजन वैवाहिक जीवन में कलह बढ़ा सकता है. पति-पत्नी के बीच तनाव और मानसिक अशांति पैदा होने की संभावना रहती है.
गोमेद
गोमेद के साथ मोती धारण करने से डर, घबराहट और नकारात्मक विचार हावी होने लगते हैं. मन हमेशा बेचैन बना रह सकता है.
पन्ना
मोती और पन्ना साथ पहनने से निर्णय क्षमता कमजोर हो सकती है. व्यक्ति भ्रमित रहने लगता है और आत्मविश्वास डगमगा सकता है.
लहसुनिया
इन दोनों रत्नों का मेल एकाग्रता को प्रभावित करता है. किसी भी काम में मन नहीं लगता और बेचैनी बनी रहती है.
