Navgrah Shanti Mantra: कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार जीवन में सुख-दुख, सफलता-असफलता और अवसरों का निर्धारण होता है. ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, चंद्रमा) सुख, समृद्धि और सकारात्मकता लाते हैं, जबकि अशुभ ग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) संघर्ष, रोग और बाधाएं उत्पन्न करते हैं. इन ग्रहों का प्रभाव कुंडली में उनकी स्थिति (भाव) और दृष्टि पर निर्भर करता है.
ग्रह दोष से राहत पाने का कारगर उपाय नवग्रह मंत्र
ग्रहों की शांति एवं ग्रह दोष से राहत पाने का सबसे कारगर उपाय नवग्रह मंत्र है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का वर्णन है. इनमें राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है. इन ग्रहों की अपनी भिन्न-भिन्न प्रकृति है और अपनी इसी प्रकृति के कारण ग्रह मनुष्य के जीवन को प्रभावित करते हैं. अगर किसी की कुंडली में ग्रह दोष बनता है तो वह व्यक्ति उस ग्रह दोष से बचने के लिए संबंधित ग्रह का वैदिक, तांत्रिक या फिर बीज मंत्र का जाप विधि अनुसार कर सकता है.
नवग्रह मंत्र के प्रकार
ग्रहों को मजबूत बनाने और उनके शुभ फल पाने के लिए भी नवग्रह मंत्र का जाप करना कारगर माना गया है. नवग्रह मंत्र के तीन प्रकार बताए गए हैं, जो वैदिक, तांत्रिक और बीज मंत्र हैं. वेद में ग्रहों से संबंधित जिन मंत्रों का वर्णन है, उन्हें वैदिक मंत्र कहा जाता है. वहीं तंत्र विद्या में उपयोग होने वाले मंत्र तांत्रिक मंत्र कहा जाता है, जबकि बीज मंत्र को मंत्रों का प्राण कहते हैं.
बीज मंत्र प्रभाव
बीज मंत्र में ग्रहों के बीज होते हैं, इसलिए इन्हें बीज मंत्र कहा जाता है. किसी भी मंत्र की शक्ति उसके बीज मंत्र में समाहित होती है. इन मंत्रों के द्वारा समस्त प्रकार की बाधाओं, विकारों तथा समस्याओं का चमत्कारिक निदान किया जा सकता है।
नवग्रह शांति मंत्र
“ॐ ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी भानु: शशि भूमिसुतो बुध च।
गुरु च शुक्र: शनि राहु केतव: सर्वेग्रहा: शान्ति करा: भवन्तु।।”
इस मंत्र में त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानि शंकर भगवान से सभी ग्रहों की शांति के लिए प्रार्थना की है, जिस प्रकार नवग्रह यंत्र की स्थापना और उसकी पूजा नवग्रह शांति के लिए की जाती है. इसी प्रकार नवग्रह मंत्र भी नवग्रह शांति के लिए जपा जाता है.
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