नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय में गूंजे वैदिक मंत्र, छात्रों का हुआ सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार

Narottam Anand Giri Ved Vidyalaya: झूंसी में परमानंद आश्रम परिसर के श्री स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आज सुबह वेदाध्ययन आरंभ करने से पूर्व नव-प्रवेशित छात्रों का सामूहिक उपनयन संस्कार विधि प्राचार्य ब्रजमोहन पांडेय की निगरानी में संपन्न हुआ.

Narottam Anand Giri Ved Vidyalaya: झूसी स्थित परमानंद आश्रम परिसर स्थित श्री स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आज प्रातः वेदाध्ययन शुरू करने से पहले नव-प्रवेशित आदित्य मिश्रा, अनुज तिवारी, आयुष्मान पाण्डेय, प्रखर मिश्रा, नन्दगोपाल मिश्रा, आयुष शुक्ला, रंजीत तिवारी, श्रीकृष्ण पांडेय का सामूहिक उपनयन संस्कार विधि संस्था के प्राचार्य ब्रजमोहन पांडेय की देख-रेख में संपन्न हुआ. बैसाख शुक्ल पक्ष द्वादशी के दिन हुए उपनयन संस्कार को छात्रों के अभिभावकों की मौजूदगी में वेद विद्यालय के विद्वान वैदिक आचार्यगणों द्वारा संपन्न कराया गया.

  • सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार में साकार हुई वैदिक परंपरा
  • भिक्षा लेकर बटुकों ने अहंकार का त्याग, विनम्रता और समाज से सहयोग से सीखने का संदेश प्राप्त किया

इस दौरान छात्रों के अभिभावक माता-पिता, निकट सम्बन्धी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे. यज्ञोपवीत धारण करने के पश्चात ही छात्र वेदाध्ययन कर सकता है. ‘उपनयन’ संस्कार के दौरान सभी नवीन बटुकों ने भिक्षा ग्रहण की. भिक्षा लेकर बटुकों ने अहंकार का त्याग, विनम्रता और समाज से सहयोग से सीखने का संदेश प्राप्त किया. भिक्षा मांगने से व्यक्ति में अहंकार कम होता है और विनम्रता आती है. जब बालक अपनी माता से भिक्षा मांगता है, तो माता उसे अन्न देकर प्रेम का अर्थ भी समझाती है. उपनयन संस्कार के बाद बालक माता-पिता की संपत्ति पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपने ज्ञान और गुरु के मार्गदर्शन में जीवन यापन करता है. परमानन्द आश्रम के प्रबंधक मोहन ब्रह्मचारी से आशीर्वाद प्राप्त किया. उपनयन संस्कार विधि करीब 5 घंटे तक चली, जिसके बाद विधिपूर्वक भंडारे-प्रसाद का वितरण किया गया.

कार्यक्रम के विषय में बताते हुए विद्यालय के प्राचार्य श्री ब्रजमोहन पांडेय ने कहा कि त्रैवर्णिक के मुख्य संस्कारों में सर्वप्रथम संस्कार ‘उपनयन’ है. ‘उपनयन’ संस्कार होने पर ही त्रैवर्णिक बालक द्विज कहलाता है. शास्त्रों के अनुसार इस संस्कार से ही बालक का विशुद्ध ज्ञानमय जन्म होता है. इस ज्ञानमय जन्म के पिता आचार्य तथा माता गायत्री हैं. यज्ञोपवीत ( यज्ञ + उपवित) का अर्थ है ब्रह्म (ईश्वर) ज्ञान के पास ले जाना. यज्ञोपवीत संस्कार से पूर्व बटुकों का मुंडन करवाया गया. बाद में विधि-विधान से भगवान गणेश सहित देवताओं का पूजन, यज्ञवेदी एवम बटुकों को अधोवस्त्र के साथ माला पहनाकर बैठाया गया. इसके बाद विनियोग मंत्र ब्रह्मचर्य के पालन की शिक्षा के साथ विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हुए. गायत्री मंत्र की दीक्षा देने के बाद बटुकों ने भिक्षा लेकर गुरु को अर्पित किया. इसके बाद गुरु ने उनके कानों में गुरु मंत्र देकर उन्हें दीक्षा दी.

शास्त्रों में संस्कारों की संख्या तो बहुत है फिर भी विद्वान प्रमुख रूप से 16 संस्कारों को मानते हैं. इनमें से एक संस्कार ‘उपनयन’ संस्कार है. इसमें विधि पूर्वक विद्यारंभ कराया जाता है. तीन सूत्रों वाले यज्ञोपवीत को गुरु मंत्र धारण करने के पश्चात शिष्य धारित करता है. तीनों धागे एक ग्रन्थि से बंधे होते हैण जिसे ब्रह्मग्रन्थि कहते हैं. यह ग्रन्थि सृष्टि के देवता ब्रह्मा जी का प्रतीक है. यज्ञोपवीत संस्कार बालक को ब्रह्मचर्य व्रत के पालन की शिक्षा देता है. तीनों सूत्र ब्रह्मा विष्णु महेश का प्रतीक है.

कार्यक्रम का संयोजन आचार्य शिवानंद द्विवेदी ने किया. इस अवसर पर चारों वेद के वरिष्ठ आचार्य खिमलाल न्योपाने (अथर्ववेद), अवनीश कुमार पांडेय (ऋग्वेद), जीवन उपाध्याय (यजुर्वेद), गौरव चंद्र जोशी (यजुर्वेद), ब्रजमोहन पाण्डेय (सामवेद), कृष्णकुमार मिश्र, अवनि कुमार सिंह, अंजनी कुमार सिंह, अजय मिश्र समेत अनेक छात्रों के अभिभावक, आश्रमवासी एवं स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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