Kali Puja 2025: काली पूजा के दिन करें माता काली के इन विशेष मंत्रों का जाप, डर-भय और कष्ट से मिलेगी मुक्ति

Kali Puja 2025: काली पूजा माता दुर्गा के विक्राल और उग्र स्वरूप माता काली को समर्पित है. कहा जाता है कि इस दिन जो भी भक्त विधिपूर्वक माता की पूजा करने के बाद माता काली के विशेष मंत्रों का जाप करता है, उसे माता शक्ति, सौंदर्य और साहस का आशीर्वाद प्रदान करती है. यहां पढ़ें माता काली के विशेष मंत्रों को.

Kali Puja 2025: काली पूजा भारत के सबसे विख्यात और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. इस त्योहार को खासकर उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और असम में दिवाली के दिन मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस पर्व को इस साल 20 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा. माता काली शक्ति, साहस और ऊर्जा का प्रतिक मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन शाम के समय माता काली की विधिपूर्वक पूजा के साथ यदि मंत्रों का जाप किया जाए, तो माता की कृपा भक्त पर सदा के लिए बनी रहती है. माता काली के मंत्र कुछ इस प्रकार हैं:

मां काली के मंत्र

ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं॥

ॐ हरिं श्रीं कलिं अद्य कालिका परम् एष्वरी स्वा:

काली मां का बीज मंत्र

ॐ क्रीं काली

भद्रकाली मंत्र

ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा॥

सप्ताक्षरी काली मंत्र

ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा

काली गायत्री मंत्र

ॐ महा काल्यै च विद्यामहे स्मसन वासिन्यै च धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात्

महाकाली बीज मंत्र

ॐ क्रीं कालिकायै नमः

मां काली का मंत्र

ॐ श्री कालिकायै नमः

दक्षिणकाली मंत्र

ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥

क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥

ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा॥

तीन अक्षरी काली मंत्र

ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं

पांच अक्षरी काली मंत्र

ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूँ फट्

पूजा हेतु काली मंत्र

कृन्ग कृन्ग कृन्ग हिन्ग कृन्ग दक्षिणे कलिके कृन्ग कृन्ग कृन्ग हरिनग हरिनग हुन्ग हुन्ग स्वा:

माता काली का प्रिय फूल क्या है? 

माना जाता है कि माता काली गुड़हल और लाल रंग के फूल अति प्रिय हैं.

काली पूजा के दिन किस रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है? 

माना जाता है कि लाल, हरा और पीला रंग का वस्त्र धारण करना बेहद शुभ होता है.

काली पूजा कब मनाया जाता है? 

पंचांग के अनुसार, काली पूजा कार्तिक मास के अमावस्या तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर दीपावली के दिन पड़ती है.

यह भी पढ़ें: Kali Puja 2025: दिवाली की आधी रात को क्यों होती मां काली की पूजा? जानें महत्व

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Neha kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >