Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत देवों के देव महादेव को समर्पित हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत और पर्व है. यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, विवाह में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं तथा ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है. मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं.
पूजा की संपूर्ण सामग्री
- शुद्ध गंगाजल
- कच्चा गाय का दूध
- दही
- शुद्ध देसी घी
- शहद
- शक्कर
- बेलपत्र
- धतूरा
- शमी के पत्ते
- सफेद आंकड़े के फूल
- सफेद चंदन
- अक्षत
- दीपक
- रुई की बत्ती
- घी या तिल का तेल
- धूपबत्ती
- अगरबत्ती
- कपूर
- मिठाई
- फल
- मौली
- माता पार्वती के लिए श्रृंगार सामग्री
पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 28 मई को सुबह 07:56 बजे से शुरू होकर अगले दिन 29 मई को सुबह 09:50 बजे तक रहेगी. चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय की जाती है, इसलिए व्रत 28 मई को ही रखा जाएगा. इस दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम 07:12 बजे से रात 09:15 बजे तक रहेगा.
पूजा की विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. सुबह शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें.
शाम को पूजा मुहूर्त शुरू होने से पहले दोबारा स्नान करें. इसके बाद मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग पर पहले जल, फिर पंचामृत और उसके बाद पुनः गंगाजल अर्पित करें. फिर चंदन का तिलक लगाकर बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें.
इसके बाद धूप, अगरबत्ती और दीपक जलाएं. फिर भोलेनाथ को फल और मिठाइयों का भोग लगाएं. पूजा के दौरान प्रदोष व्रत कथा पढ़ें या सुनें और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. अंत में कपूर जलाकर भगवान शिव की आरती करें.
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