Gangaur 2026: उत्तर भारत के प्रमुख त्योहारों में गणगौर का विशेष स्थान है. यह पर्व खासतौर पर राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती (गौरी) की पूजा कर अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली, सौभाग्य और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं. वर्ष 2026 में गणगौर पूजा 21 मार्च, शनिवार को मनाई जा रही है.
गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 2 बजकर 31 मिनट से प्रारंभ होकर रात 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी. इस पूरे दिन गणगौर व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए श्रद्धालु इसी दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं.
गणगौर पूजा सामग्री
गणगौर पूजा में कई महत्वपूर्ण वस्तुओं का उपयोग किया जाता है. इसमें ईसर-गौरी की मूर्तियां (मिट्टी या लकड़ी की), लकड़ी की चौकी, कलश, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम, रोली, अक्षत, फूल, दूब, सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, मंगलसूत्र, दीपक, धूप, नैवेद्य (हलवा, पूड़ी, फल), पान, सुपारी, ज्वारा, गुड़, चंदन, रंगीन वस्त्र, मौली और दक्षिणा शामिल हैं. ये सभी सामग्री पूजा को पूर्णता प्रदान करती हैं.
गणगौर पूजा की सरल विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. इसके बाद ईसर-गौरी की मूर्तियों को स्थापित करें और कलश में गंगाजल भरकर ज्वारा रखें. मूर्तियों को श्रृंगार सामग्री जैसे सिंदूर, मेहंदी और आभूषण अर्पित करें. फिर जल, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य से विधिपूर्वक पूजा करें. अंत में गणगौर के गीत गाकर आरती उतारें और प्रसाद वितरित करें.
गणगौर का महत्व
गणगौर पर्व वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता और स्थिरता आती है. अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं. राजस्थान में यह पर्व पारंपरिक परिधानों, लोकगीतों और नृत्य के साथ विशेष उल्लास से मनाया जाता है.
