गणगौर व्रत 2026, अखंड सुहाग की कामना का पर्व

Gangaur 2026: गणगौर राजस्थान का प्रमुख पर्व है, जिसमें महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर सौभाग्य, प्रेम और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं. यह आस्था और परंपरा का उत्सव है.

शंकर जालान, कोलकाता

Gangaur 2026: राजस्थान का प्रमुख लोकपर्व गणगौर आस्था, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द्र का प्रतीक है. ‘गण’ का अर्थ भगवान शिव और ‘गौर’ का अर्थ माता पार्वती है. यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए व्रत रखती हैं, वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं.

गणगौर पर्व का समय और परंपरा

गणगौर का उत्सव होलिका दहन के दूसरे दिन, यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक कुल 18 दिनों तक चलता है. लोक मान्यता के अनुसार, माता गौरी इस अवधि में अपने मायके आती हैं और भगवान शिव उन्हें विदा कराने के लिए आते हैं. अंतिम दिन यानी तीज पर उनका विदाई समारोह बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

इस दौरान महिलाएं सुंदर प्रतिमाएं बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं और लोकगीत गाते हुए पूजा-अर्चना करती हैं. ये लोकगीत गणगौर पर्व की आत्मा माने जाते हैं, जिनमें शिव-पार्वती के रिश्ते को पारिवारिक रूप में दर्शाया जाता है.

गणगौर व्रत कथा

धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव, माता पार्वती और नारद मुनि पृथ्वी भ्रमण पर निकले. चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन वे एक गांव पहुंचे. सबसे पहले गरीब महिलाएं साधारण फूल और जल लेकर पूजा करने आईं. उनकी सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया.

कुछ समय बाद धनी महिलाएं भव्य भोग और आभूषणों के साथ आईं. तब माता पार्वती ने अपनी उंगली से रक्त की बूंदें छिड़ककर उन्हें भी विशेष आशीर्वाद दिया. इसके पश्चात उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाकर पूजा की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और वरदान दिया कि जो महिला इस दिन शिव-गौरी का पूजन करेगी, उसका सुहाग अटल रहेगा.

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पर्व का संदेश

गणगौर का पर्व यह सिखाता है कि ईश्वर के लिए भक्ति और सच्ची भावना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, न कि भौतिक साधन. यह त्योहार महिलाओं के जीवन में प्रेम, समर्पण और विश्वास को मजबूत बनाता है.

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Published by: Shaurya punj

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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