Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र व्रत है. इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है.
देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास का प्रारंभ होता है. यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है.
प्रातःकाल करें व्रत और पूजा का संकल्प
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद स्वच्छ एवं पीले रंग के वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लेना शुभ माना जाता है. पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है और इसे समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.
भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें
इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए. पूजा के दौरान निम्न सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है:
- पीले पुष्प
- चंदन
- धूप और दीप
- फल एवं मिठाई
- पीले वस्त्र
- तुलसी दल
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
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मंत्र जाप और दान-पुण्य का विशेष महत्व
देवशयनी एकादशी पर दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.
जाप करें:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
इसके साथ ही अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करना भी शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि दान-पुण्य से पुण्य फल में वृद्धि होती है.
तुलसी पूजन से मिलती है लक्ष्मी कृपा
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना और श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करना विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
