Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना है. चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, जिससे सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाता और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय कुछ कार्य जैसे सोना या खाना बनाना वर्जित होते हैं. आइए जानते हैं ऐसा करने के पीछे क्या कारण है.
ग्रहण के समय सोना क्यों वर्जित है?
चंद्र ग्रहण के समय सोना वर्जित माना जाता है क्योंकि इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति मन और शरीर पर प्रतिकूल असर डालती है. सोते समय व्यक्ति इन नकारात्मक ऊर्जाओं के संपर्क में आ सकता है, जिससे स्वास्थ्य, मानसिक शांति और ऊर्जा पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इसलिए ग्रहण के समय जागरण और ध्यान करना शुभ माना जाता है.
ग्रहण के दौरान खाना बनाना क्यों वर्जित है?
ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहण के समय खाना बनाना हानिकारक होता है. इस समय पकाया गया भोजन अशुद्ध माना जाता है. ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है, जिससे भोजन का प्रभाव भी प्रभावित होता है. इसलिए धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के दौरान घर में खाना बनाने से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है.
चंद्र ग्रहण कब शुरू और समाप्त होगा?
- चंद्र ग्रहण की शुरूआत: 3 मार्च 2026, दोपहर 03:20 बजे
- चंद्र ग्रहण का समापन: 3 मार्च 2026, शाम 06:47 बजे
चंद्र ग्रहण 2026 का सूतक काल
चूंकि चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू होता है, इसलिए इसका प्रारंभ 3 मार्च 2026 की सुबह 06:20 बजे से होगा. यह सूतक काल ग्रहण के समाप्त होने के साथ ही समाप्त हो जाएगा.
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