होली से पहले लाल होगा चांद, आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा

Chandra Grahan 2026: होली से ठीक पहले आसमान में अनोखा दृश्य दिखेगा. पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चांद लाल आभा में नजर आएगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है.

Chandra Grahan 2026: आज यानी 3 मार्च 2026 को आसमान में एक दुर्लभ और रोमांचक खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. इस दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. जब चंद्रमा सीधे पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण बनता है. जैसे-जैसे चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, उसकी चमक धीरे-धीरे कम होने लगती है. कुछ समय बाद वह हल्की लाल आभा में बदल जाता है. जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में डूब जाता है, तो इसे ग्रहण की “पूर्णता” कहा जाता है. आम भाषा में इसे “ब्लड मून” या “रक्त चंद्रमा” भी कहते हैं. इस सुंदर नजारे को बिना किसी विशेष उपकरण के नंगी आंखों से देखा जा सकेगा.

किन-किन जगहों पर दिखेगा ग्रहण

साल का यह पहला और भारत में दिखने वाला एकमात्र चंद्र ग्रहण होगा. यह भारत के साथ-साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में साफ दिखाई देगा. नॉर्थ और साउथ अमेरिका तथा प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में भी यह नजर आएगा. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में इसका दृश्य सबसे अच्छा माना जा रहा है.

भारत के कई बड़े शहरों में लोग इसे देख सकेंगे. इनमें दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पटना, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, इंफाल, शिलॉन्ग, कोहिमा और ईटानगर शामिल हैं.

चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है?

पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं. पृथ्वी बीच में होती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है, तो नीली रोशनी बिखर जाती है और लाल रंग की रोशनी आगे बढ़ती है. यही लाल रोशनी पृथ्वी की छाया के बीच से होकर चंद्रमा तक पहुंचती है. इस कारण चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है.

इस प्रक्रिया को “रेले प्रकीर्णन” कहा जाता है. यदि वायुमंडल में धूल या धुंध ज्यादा हो, तो चंद्रमा और गहरा लाल दिखाई दे सकता है. यही वजह है कि हर पूर्ण चंद्र ग्रहण का रंग थोड़ा अलग हो सकता है.

कितनी देर तक चलेगा ग्रहण?

चंद्र ग्रहण एक धीमी प्रक्रिया है, जो कई घंटों तक चलती है. इस बार चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में प्रवेश करने में लगभग 75 मिनट लगेंगे. इस अवस्था को आंशिक ग्रहण कहा जाता है. इसके बाद करीब एक घंटे तक पूर्ण ग्रहण रहेगा, जब चंद्रमा पूरी तरह लाल दिखाई देगा. फिर अगले 75 मिनट में चंद्रमा धीरे-धीरे छाया से बाहर निकल आएगा और अपनी सामान्य चमक में लौट जाएगा.

कुल मिलाकर खंडग्रास चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 3 घंटे 25 मिनट 17 सेकेंड रहेगी. भारत में ग्रहण का पहला स्पर्श दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर होगा और अंतिम स्पर्श शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा.

सूतक काल की जानकारी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है. इस बार सूतक काल 3 मार्च 2026 की सुबह 9 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा.

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क्यों है यह अवसर खास?

वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह का पूर्ण चंद्र ग्रहण अब 2029 से पहले देखने को नहीं मिलेगा. इसलिए यह अवसर खास माना जा रहा है. आसमान में लाल चंद्रमा का दृश्य न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देखने में भी बेहद आकर्षक होता है. इसलिए 3 मार्च की शाम आसमान की ओर जरूर देखें और इस अद्भुत खगोलीय घटना का आनंद लें.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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