Chaitra Navratri 2026: भारत में नवरात्रि का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. वैसे तो साल में चार नवरात्रि आते हैं और सभी का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन चैत्र नवरात्रि यानी बसंत नवरात्रि का उत्सव खास महत्व है. यह पर्व हिंदू नववर्ष के आरंभ से जुड़ा माना जाता है और भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के समय संपन्न होता है. माता के भक्त नौ दिनों तक पूजा-पाठ, जप, अर्चना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. शास्त्रों के अनुसार हवन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कर्म भी माना गया है. मान्यता है कि हवन करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और शुभ प्रभाव बढ़ता है.
पूजा में हवन क्यों किया जाता है?
हिंदू धर्म में पूजा के साथ हवन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में हवन को शुद्धिकरण का माध्यम माना जाता है. ऐसा विश्वास है कि यदि पूजा-पाठ में कोई त्रुटि रह जाए, तो उसकी पूर्ति हवन से हो जाती है.
इसके साथ ही हवन को वातावरण शुद्ध करने का एक महत्वपूर्ण साधन भी माना गया है. हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करके उसमें लकड़ी, ऋतु-फल, शहद, घी, गुड़ और जड़ी-बूटियों की आहुति दी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इससे वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है. प्राचीन समय में ऋषि-मुनि यज्ञ और हवन के माध्यम से प्रकृति और जीवन के संतुलन को बनाए रखने का प्रयास करते थे.
चैत्र नवरात्रि 2026 अष्टमी तिथि कब से शुरू होगी?
- अष्टमी तिथि का आरंभ: 25 मार्च 2026, शाम 4:30 बजे से
- अष्टमी तिथि का समापन: 26 मार्च 2026, दोपहर 2:15 बजे तक
जो लोग महाष्टमी व्रत रखते हैं, उनके लिए 26 मार्च 2026 को व्रत रखना उपयुक्त रहेगा. इसी दिन अष्टमी पूजा की जाएगी. कुछ स्थानों पर रात्रि में निशा पूजा का भी विधान माना जाता है.
चैत्र नवरात्रि 2026 नवमी तिथि कब से रहेगी?
- नवमी तिथि का आरंभ: 26 मार्च 2026, दोपहर 2:15 बजे से
- नवमी तिथि का समापन: 27 मार्च 2026, दोपहर 12:02 बजे तक
दुर्गा पाठ का हवन कब करें?
यदि आप चैत्र नवरात्रि में मां जगदंबा का पूजन कर रहे हैं या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं, तो पाठ की समाप्ति और हवन 27 मार्च 2026 को दोपहर 12:00 बजे से पहले कर लेना शुभ माना जाएगा. हवन नवमी तिथि में पूर्ण करना अधिक फलदायी माना जाता है.
कन्या पूजन कब करें और क्या हैं नियम?
कन्या पूजन 27 मार्च 2026 को नवमी तिथि में करना श्रेष्ठ रहेगा. कन्या पूजन से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-
- कन्याओं की आयु सामान्यतः 2 वर्ष से 10 वर्ष तक मानी जाती है.
- कन्याओं को घर बुलाकर सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाना चाहिए.
- भोजन कराने से पहले उनके चरण स्वच्छ जल से धोने चाहिए.
- इसके बाद चंदन और कुमकुम का तिलक लगाना चाहिए.
- भोजन शुद्ध और सात्विक होना चाहिए.
- पूजन के बाद कन्याओं को श्रद्धा अनुसार उपहार, श्रृंगार सामग्री, दक्षिणा और फल देना शुभ माना जाता है.
ध्यान रखने योग्य बात
कन्या पूजन में सबसे जरूरी बात श्रद्धा और शुद्धता है. केवल नियम निभाने के लिए नहीं, बल्कि भक्ति भाव से पूजन करना ही सबसे महत्वपूर्ण माना गया है.
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594 / 9545290847
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