चैत्र छठ 2026: संध्या अर्घ्य के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें व्रत के नियम

Chaitra Chhath 2026: चैत्र छठ माता छठी और सूर्य देव को समर्पित है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस व्रत को करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. हालांकि, पूजा का फल तभी प्राप्त होता है जब व्रत सभी नियमों का पालन करते हुए विधि-विधान से किया जाए. ऐसे में आइए जानते हैं कि संध्या अर्घ्य के दिन क्या करें और क्या न करें.

Chaitra Chhath 2026: चैत्र नवरात्रि भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र त्योहारों में से एक है. इसे हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से भी एक माना जाता है, क्योंकि छठ पर्व के दौरान व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं. वर्ष 2026 में इस पावन व्रत की शुरुआत 22 मार्च से हुई है, जो 25 मार्च को समाप्त होगी. पर्व के तीसरे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है, यानी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. इस व्रत के नियम बेहद सख्त होते हैं. व्रत के दौरान की गई छोटी-सी गलती भी पूरे व्रत का फल नष्ट कर सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि संध्या अर्घ्य के दौरान व्रती को किन-किन सावधानियों का पालन करना चाहिए.

संध्या अर्घ्य के दिन न करें ये गलतियां

  • प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों का प्रयोग: अर्घ्य देते समय या प्रसाद रखने के लिए चांदी, स्टील, शीशा या प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग वर्जित माना जाता है. केवल बांस के सूप/टोकरी और मिट्टी के दीपकों का ही प्रयोग करना चाहिए. हालांकि, पीतल के बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है.
  • प्रसाद की शुद्धता: छठ का प्रसाद बनाते समय उसे चखना या जूठा करना महापाप माना जाता है. इसे हमेशा नए या पूरी तरह साफ चूल्हे पर ही बनाना चाहिए. इसके बाद प्रसाद को शुद्ध और स्वच्छ पात्र में रखना चाहिए.
  • तामसिक भोजन और व्यसन: व्रत के दौरान घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रवेश वर्जित होता है. परिवार के अन्य सदस्यों को भी नशा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए.
  • बिस्तर पर सोना: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने वाले व्यक्ति को पलंग या गद्देदार बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए. इन चार दिनों में जमीन पर चटाई या चादर बिछाकर सोने का विधान है.
  • क्रोध और अपशब्द: यह पर्व मानसिक शुद्धता का भी प्रतीक है. किसी को अपशब्द कहना, गुस्सा करना या विवाद करना व्रत के फल को नष्ट कर सकता है.

छठ व्रत के अन्य जरूरी नियम

  • 36 घंटे का निर्जला व्रत: खरना के प्रसाद के बाद से लेकर चौथे दिन के उषा अर्घ्य तक व्रती को अन्न और जल का त्याग करना होता है.
  • साफ-सफाई: पूजा के समय घर और घाट की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजा सामग्री को कभी भी गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए.
  • सूर्य देव का ध्यान: अर्घ्य देते समय मन में सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करें और जल की धारा के माध्यम से ढलते हुए सूर्य को देखें.

यह भी पढ़ें: Chaitra Chhath Rules: छठ पूजा में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? व्रत तोड़ें या पूरा करें, जानें नियम

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >