Chaiti Chhath 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू हुआ चैती छठ महापर्व अब विधिवत संपन्न हो गया. चैत्र शुक्ल सप्तमी के दिन व्रतियों ने उगते सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य अर्पित कर अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया. इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने उषा अर्घ्य देकर छठी मइया और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया. यह पर्व आस्था, संयम और प्रकृति के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण है.
छठी मइया और सूर्य देव की भक्ति
छठ पर्व मुख्य रूप से छठी मइया और सूर्य देव की पूजा के लिए समर्पित होता है. व्रती महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में घाटों पर पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की. संध्या के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया, वहीं सप्तमी की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया गया. घाटों पर गूंजते छठ गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया.
पूजन सामग्री और परंपराएं
इस दौरान व्रती नदी, तालाब या सरोवर के किनारे कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं. बांस की सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल, कसार और केले जैसे प्रसाद अर्पित किए जाते हैं. छठ पूजा में शुद्धता और सात्त्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है. व्रती सादे वस्त्र धारण करते हैं और पूरे नियमों का पालन करते हैं.
साल में दो बार मनाया जाता है छठ पर्व
छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है—पहली बार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में. बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व विशेष श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाता है.
2026 में छठ पूजा की तिथियां
- 13 नवंबर, शुक्रवार: नहाय-खाय
- 14 नवंबर, शनिवार: खरना
- 15 नवंबर, रविवार: संध्या अर्घ्य
- 16 नवंबर, सोमवार: उषा अर्घ्य और पारण
