Bakrid 2026: कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद कहा जाता है, गुरुवार को मनाया जाएगा. बकरीद हर साल हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और कुर्बानी की याद में मनाई जाती है. इस दिन ईदगाहों और मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है. इसके बाद सबकी खुशहाली के लिए दुआ मांगी जाती है और फिर कुर्बानी दी जाती है. बकरीद में ईद से पहले नमाज होती है. सुबह से ही नमाज का सिलसिला शुरू हो जाता है और अधिकतर जगहों पर सुबह 10 बजे तक नमाज पूरी हो जाती है.
क्यों जल्दी होती है बकरीद की नमाज?
इस दिन कुर्बानी की रस्म अदा की जाती है, इसलिए नमाज जल्दी होती है ताकि समय रहते कुर्बानी पूरी की जा सके. लोग ईदगाहों में जाने के बजाय अपने मोहल्लों की मस्जिदों में नमाज पढ़ना अधिक पसंद करते हैं. नमाज अदा करने के बाद लोग जरूरतमंदों की मदद करते हैं और कुर्बानी का हिस्सा आस-पड़ोस व गरीबों में बांटते हैं, ताकि हर जरूरतमंद त्योहार की खुशी में शामिल हो सके.
बकरीद में दो रकअत की नमाज पढ़ी जाती है, जिसमें छह अतिरिक्त तकबीरें होती हैं. पहली रकअत में तीन और दूसरी रकअत में तीन तकबीरें कही जाती हैं.
इस बार बकरे की ऑनलाइन डिलीवरी
त्योहार को लेकर बाजारों में खरीदारी के लिए भारी भीड़ रही. सबसे ज्यादा भीड़ बकरों की दुकानों पर देखने को मिली, जहां लोगों ने अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी की. 10 हजार से 50 हजार रुपये तक के बकरों की सबसे अधिक बिक्री हुई. डॉ. फतेउल्लाह रोड स्थित बाजार में सुबह से ही खरीदार और विक्रेता पहुंचने लगे थे.
वहीं कई मुस्लिम बहुल इलाकों में विक्रेता बकरों को घुमाकर भी बेच रहे थे. बकरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया था. कई लोगों ने पहले ही खरीदारी कर ली थी, जबकि कुछ लोगों ने ऑनलाइन बकरे मंगवाए. इधर राशन दुकानों से लेकर सेवई और बेकरी की दुकानों तक अच्छी-खासी भीड़ रही.
इच्छाओं और घमंड का त्याग ही सच्ची कुर्बानी : मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी
मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने कहा कि कुर्बानी हमें पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी, अल्लाह के प्रति उनकी आज्ञाकारिता और समर्पण की भावना की याद दिलाती है. उन्होंने कहा कि यह ईद सिर्फ जानवरों की कुर्बानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें अपनी इच्छाओं, घमंड, जलन और बुराइयों का त्याग करना भी सिखाती है. यह त्योहार इंसानियत की भलाई के लिए खुद को समर्पित करने का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि आज समाज में एकता, भाईचारा, सब्र, दया और त्याग की भावना को बढ़ावा देने की जरूरत है. लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि ईद के अवसर पर साफ-सफाई, सुन्नत का पालन, शांति-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द का विशेष ध्यान रखें. साथ ही दुआ की कि अल्लाह हमारी इबादत, कुर्बानी और दुआओं को कबूल करे और देश में अमन-चैन कायम रखे.
रांची ईदगाह में सुबह नौ बजे अदा होगी नमाज
हरमू रोड स्थित रांची ईदगाह में सुबह नौ बजे बकरीद की नमाज अदा की जाएगी. खतीब मौलाना डॉ. असगर मिस्बाही नमाज पढ़ाएंगे. वहीं डोरंडा ईदगाह में सुबह साढ़े आठ बजे नमाज होगी. अन्य ईदगाहों और मस्जिदों में तय समय के अनुसार नमाज अदा की जाएगी.
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त्याग और बलिदान का पैगाम देती है बकरीद : मौलाना डॉ. असगर मिस्बाही
रांची ईदगाह के खतीब मौलाना डॉ. असगर मिस्बाही ने कहा कि बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है, त्याग और बलिदान का संदेश देती है. यह मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है और इसे ईद-ए-कुर्बा के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने बताया कि करीब 1400 साल पहले जब हजरत मोहम्मद मक्का से मदीना पहुंचे, तो वहां के लोग साल में दो दिन खुशी मनाते थे. एक दिन का नाम महरजान और दूसरे का नाम निरोज था. उन दिनों लोग खेलकूद और उत्सव में व्यस्त रहते थे. इस पर हजरत मोहम्मद ने कहा कि अल्लाह ने इन दो दिनों के बदले मुसलमानों को दो बेहतर त्योहार दिए हैं — ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा. तभी से मुसलमान इन दोनों त्योहारों को खुशी और उल्लास के साथ मनाते आ रहे हैं. उन्होंने लोगों को बकरीद की मुबारकबाद देते हुए आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की.
