Bakrid 2026 Date: रमजान और ईद-उल-फितर के बाद मुसलमानों को जिस त्योहार का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है, वह है बकरीद. इसे ईद-उल-अजहा या बकरा ईद के नाम से भी जाना जाता है. इस्लाम धर्म में यह त्योहार त्याग, बलिदान और इंसानियत की भावना का प्रतीक माना जाता है. दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इस पर्व को बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाता है.
2026 में कब मनाई जाएगी बकरीद?
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अजहा हर साल जुल हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक भारत में बकरीद 27 मई 2026, बुधवार को मनाए जाने की संभावना है. हालांकि इस त्योहार की अंतिम तारीख चांद दिखने के बाद ही तय होती है.
बकरीद के अवसर पर भारत में राजपत्रित अवकाश रहता है. इस दिन अधिकांश सरकारी कार्यालय, स्कूल और कई संस्थान बंद रहते हैं. लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ इस पर्व को मनाते हैं.
कुर्बानी और त्याग का संदेश देता है त्योहार
बकरीद को कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था. उनकी इसी आस्था और समर्पण की याद में मुस्लिम समुदाय इस दिन बकरे, भेड़, ऊंट या अन्य निर्धारित पशुओं की कुर्बानी देता है.
कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की परंपरा है. पहला हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तथा तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है. यह परंपरा समाज में समानता, भाईचारे और जरूरतमंदों की सहायता का संदेश देती है.
कैसे मनाई जाती है ईद-उल-अजहा?
बकरीद के दिन सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करते हैं. नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं.
इसके बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है और जरूरतमंदों में गोश्त बांटा जाता है. यह पर्व हज यात्रा के समापन का भी प्रतीक माना जाता है. बकरीद का त्योहार त्याग, इंसानियत, सेवा और भाईचारे की भावना को मजबूत करने वाला पर्व माना जाता है.
