Bada Mangal 2026: 5 मई से ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल की शुरुआत हो रही है. हिंदू धर्म में ज्येष्ठ महीने के प्रत्येक मंगलवार का विशेष महत्व माना जाता है. इन मंगलवारों को “बड़ा मंगल” कहा जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसे “बुढ़वा मंगल” के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे महीने में हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि इस समय हनुमान जी की आराधना करने से उनकी कृपा शीघ्र मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
बुढ़वा मंगल क्यों कहा जाता है?
कुछ धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ज्येष्ठ माह के इन मंगलों पर हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है. इसी कारण इन्हें “बुढ़वा मंगल” कहा जाता है. यह समय साधना और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है.
19 साल बाद बना विशेष संयोग
इस वर्ष बड़े मंगल का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि लगभग 19 साल बाद ऐसा शुभ संयोग बना है. साल 2007 के बाद पहली बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास आया है. इस दुर्लभ संयोग में हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए किए गए उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं.
पूजा का शुभ मुहूर्त
पहले बड़े मंगल पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:12 बजे से 4:55 बजे तक रहेगा, जो पूजा और व्रत संकल्प के लिए सबसे उत्तम समय है. यदि इस समय पूजा संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा. इसके अलावा, शाम का गोधूलि मुहूर्त 6:57 बजे से 7:19 बजे तक है, जिसमें संध्या पूजा और व्रत का पारण किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: बड़ा मंगल 2026: राम-हनुमान मिलन की कहानी और जानें इसका खास महत्व
बड़े मंगल पर करें ये पुण्य कार्य
इस दिन पूजा-पाठ के साथ हनुमान जी के मंदिर जाकर दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है. साथ ही, जल दान का विशेष महत्व है—राहगीरों को ठंडा पानी या शरबत पिलाना पुण्यदायी होता है. पक्षियों के लिए पानी रखना और बंदरों को गुड़-चना खिलाना भी शुभ माना गया है. इसके अतिरिक्त, जरूरतमंदों या मंदिर में पानी से भरा मटका दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी कार्य है.
