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Ayodhya Ram Mandir: हिंदू धर्म की 36 परंपराओं के साथ रखी गई राम मंदिर की आधारशिला, देशभर के 21 अलग-अलग पुजारियों की रही भागीदारी

By Prabhat khabar Digital
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Ayodhya Ram Mandir Bhumi Pujan: राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की गई. इस दौरान हिंदू धर्म की 36 परंपराओं के साथ राम मंदिर की आधारशिला रखी गईं. राम मंदिर निर्माण की अधारशिला रखने के लिए नेपाल के भी आध्यात्मिक परंपराओं के गुरुओं को आमंत्रित किया गया था. राम मंदिर के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम में 36 आध्यात्मिक परंपराओं के लगभग 135 गुरु मौजूद थे. इसके साथ ही नेपाल के संतों को भी आमंत्रित किया गया है, क्योंकि जनकपुर का बिहार, उत्तर प्रदेश और अयोध्या से भी संबंध है.

इस दौरान काशी और अयोध्या के 21 पुजारी भूमि पूजन संपन्न कराएं. भूमि पूजन के इस कार्यक्रम में काशी, अयोध्या, दिल्ली, प्रयाग के विद्वानों को बुलाया गया था. रिपोर्ट्स के अनुसार पूरे कार्यक्रम को कुल 21 पुजारी भूमि पूजन कराएंगे. ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी अयोध्या के अधिष्ठाता हैं, इसलिए सबसे पहले उन्हीं की पूजा होगी. हिंदू धर्म समेत कई परंपराओं से संबंध रखने वाले गुरु इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें. इन सभी परंपराओं के गुरुओं के उपस्थिति में पीएम मोदी भूमि पूजन किये. भूमि पूजन के लिए शुभ मुहूर्त सिर्फ 32 सेकेंड है. यह 32 सेकेंड बेहद ही खास रहा. इस अवसर पर काशी और अयोध्या के 21 पुजारियों की एक टीम पूजा संपन्न करवायी.

पीएम के साथ मंच पर मौजूद रहें सिर्फ 5 लोग

आज राम जन्मभूमि परिसर में किसी को प्रवेश नहीं मिला, क्योंकि निमंत्रण पत्र पर सिक्योरिटी कोड था. एक बार कोड स्कैन हो जाने के बाद निमंत्रण पत्र का दूसरी बार इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. कार्यक्रम में मोबाइल और बैग लाने पर पाबंदी है. मुख्य मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहें. प्रधानमंत्री 9 शिलाओं की स्थापना भी किये.

18 अप्रैल से ही राम जन्मभूमि पर शुरू है अनुष्ठान

राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के अनुसार श्री राम जन्मभूमि पर पूजन और अनुष्ठान 18 अप्रैल से शुरू ही गया था. हर दिन वेदपाठ, पुरुष सूक्त, श्रीसूक्त, अघोर मंत्र, वास्तु ग्रह, नक्षत्र शांति के पाठ, विष्णु सहस्त्र नाम, श्रीराम सहस्त्रनाम, हनुमान सहस्त्र नाम और दुर्गा सप्तशती पाठ के मंत्रों से हवन किया गया है. इससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ है. राम मंदिर की नींव में डालने के लिए श्रीलंका के समुद्र से भी जल मंगाया गया है. देश भर के 2000 से अधिक तीर्थ स्थानों की मिट्टी, 100 से अधिक पवित्र नदियों और कुंडों से जल अयोध्या लाया गया है.

News posted by : Radheshyam kushwaha

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