Akshaya Tritiya 2026: सनातन परंपरा में वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. इसी माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष 20 अप्रैल को विशेष शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा. आचार्य राकेश झा के अनुसार इस दिन कृत्तिका और रोहिणी नक्षत्र का संगम होगा, साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग, सौभाग्य योग और रवियोग जैसे दुर्लभ योग बन रहे हैं, जो इस पर्व के महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं. इन शुभ योगों के कारण यह दिन अत्यंत फलदायी माना जा रहा है.
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है. श्रद्धालु कमल के पुष्प, खीर और घी का दीपक अर्पित कर विधिपूर्वक पूजा करते हैं. साथ ही श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से सहस्त्र गोदान के बराबर फल मिलता है.
दान-पुण्य का विशेष महत्व
अक्षय तृतीया को दान-पुण्य का महापर्व कहा जाता है. इस दिन सत्तू, जल, गुड़, छाता, अन्न और वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों और पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी विशेष पुण्यदायी होता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है और उसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है.
खरीदारी के लिए शुभ दिन
यह दिन खरीदारी के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है. इस अवसर पर सोना, चांदी, कांसा, रत्न या स्थायी संपत्ति खरीदना लाभकारी होता है. यदि यह संभव न हो, तो मिट्टी के बर्तन, दीपक या कलश की खरीद भी स्वर्ण के समान फलदायी मानी जाती है.
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शुभ मुहूर्त का समय
तृतीया तिथि सुबह 10:45 बजे तक रहेगी, जबकि पूरे दिन पुण्यकाल रहेगा. रोहिणी नक्षत्र सुबह 7:45 बजे से प्रारंभ होगा. सुबह 8:36 से 10:12 बजे तक शुभ योग मुहूर्त, 11:23 से 12:14 बजे तक अभिजीत मुहूर्त तथा दोपहर 1:25 से शाम 6:14 बजे तक चर, लाभ और अमृत मुहूर्त रहेगा, जो पूजा और खरीदारी के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है.
