अधिक राम लक्ष्मण द्वादशी 2026 आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Adhik Ram Lakshman Dwadashi: अधिक राम लक्ष्मण द्वादशी पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी की पूजा का विशेष महत्व है. जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, धार्मिक महत्व और पूजा करने का सही तरीका.

Adhik Ram Lakshman Dwadashi: वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर राम लक्ष्मण द्वादशी का पर्व मनाया जाता है. इस वर्ष अधिक मास पड़ने के कारण इसे “अधिक राम लक्ष्मण द्वादशी” के नाम से जाना जाएगा. यह पावन दिन भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण जी को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा, व्रत और दान करने से भगवान विष्णु और श्रीराम की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

आज अधिक राम लक्ष्मण द्वादशी का शुभ मुहूर्त

बुधवार को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 25 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 12 मिनट पर होगा. चंद्रोदय दोपहर 3 बजकर 51 मिनट पर तथा चंद्रास्त अगले दिन यानी 28 मई की सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर होगा.

एकादशी तिथि सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी. इस दिन चित्रा नक्षत्र और व्यतीपात योग का विशेष संयोग बन रहा है. साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग भी सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक रहेंगे, जो पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माने गए हैं.

बुधवार के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:03 बजे से 4:44 बजे तक
  • प्रातः संध्या : सुबह 4:24 बजे से 5:25 बजे तक
  • विजय मुहूर्त : दोपहर 2:36 बजे से 3:31 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:10 बजे से 7:31 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त : रात 11:58 बजे से 12:39 बजे तक

इन शुभ मुहूर्तों में पूजा और मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

राम लक्ष्मण द्वादशी का धार्मिक महत्व

राम लक्ष्मण द्वादशी का व्रत धर्म, त्याग, मर्यादा और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी की पूजा करने से परिवार में प्रेम और एकता बनी रहती है. यह व्रत भगवान विष्णु को भी अत्यंत प्रिय माना गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति और सौभाग्य में वृद्धि होती है.

राम लक्ष्मण द्वादशी व्रत विधि

इस दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की प्रतिमा स्थापित करें. दीपक जलाकर धूप, फूल, तुलसी और फल अर्पित करें.

इसके बाद “श्रीराम जय राम जय जय राम” मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. रामायण का पाठ और भजन-कीर्तन करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित करें तथा जरूरतमंदों को अन्न और धन का दान करें.

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लेखक के बारे में

Published by: Shaurya punj

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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