यदि आपको कभी कोई समस्या हुई हो और आप दिन भर उसके बारे में सोचते रहे हों, ऐसा क्या आपने कभी गौर किया है? और उस समस्या के बारे में आपका सोचना रात भर भी जारी रहा हो. उस समस्या के बारे में चिंता करना और फिर आप दूसरे दिन भी सोचते-सोचते से थके हुए उठें, फिर दिन भर उसके बारे में चिंता करें वैसे ही जैसे एक कुत्ता सारा दिन हड्डी को चबाता रहता है.
फिर तीसरे दिन भी आप जब रात को बिस्तर पर जायें, तब भी वह समस्या लेकर जायें… ये सब तब तक चले जब तक आपका दिमाग चुक नहीं जाता और तब शायद इस चुक जाने और आपके दिमाग का काम कर देना बंद कर देने पर आप कुछ नया और तरोताजा पाते हैं. यहां हम जो कह रहे हैं, वह आत्यंतिक रूप से भिन्न है जो यह है कि- जैसे ही समस्या सिर उठाती दिखे उसे तुरंत त्वरित रूप से खत्म कर दिया जाये, उसे सारा दिन घसीटा ना जाये, यहां तक कि उसे अगले मिनट पर भी न टाला जाये और पूरी तरह से खत्म कर दिया जाये. कोई आपका अपमान कर देता है, कोई आपके दिल को चोट पहुंचा देता है, उस बात को वहीं देख-सुन कर खत्म कर दें.
कोई आपको धोखा दे, आपके बारे में भला-बुरा कहे, उसे देखें सुने, पर घटना को अपने पर लाद ही ना लें, जो भी समस्या है, उसे तुरंत निपटा दें. उसे उसी वक्त खत्म कर दें, जब वह कहा या सुना जा रहा हो, जब वह घटित हो रहा हो, न कि उसके बाद कभी… क्या आपने कभी सोचा है कि हम तनाव में क्यों आते हैं? क्या तनाव तभी नहीं होता, जब प्रतिरोध होता है? हमारे आसपास ही कई आवाजें शोर के रूप में रहती हैं- कुत्ते का भौंकना, बसों की आवाजाही, या मैकेनिकों की दुकानों में ठोकने-पीटने की आवाजें. जब आप प्रतिरोध करते हैं, तनाव खड़ा हो जाता है.
यदि आप किसी तरह का प्रतिरोध ना बनायें और शोर को वैसे ही होते रहने दें, शांतचित्त होकर सुनें, बिना किसी प्रतिरोध के, यह ना कहें कि यह अच्छा है या बुरा है, बस केवल सुनें, तो कोई तनाव नहीं होगा. जब तक कोई कोशिश या प्रतिरोध नहीं होगा, तनाव नहीं हो सकता. प्रतिरोधरहित संवदेनशक्ति संपन्न व्यक्ति कभी भी नर्वस टेंशन और नर्वस ब्रेकडाउन का शिकार नहीं हो सकता.
-जे कृष्णमूर्ति
