प्रकृति का शात नियम

हम सभी को ब्रह्मांडीय एकत्व भाव की ओर ही अग्रसर होना है. वह है- वसुधैव कुटुंबकम्. जीवन को सुगमता व शांति से झेलने के लिए सभी को कोई-ना-कोई या किसी-ना किसी आध्यात्मिक संबल की आवश्यकता होती ही है. ऐसे में किसी को क्या अंतर पड़ता है, यदि वह सांई बाबा को पूजने से प्राप्त हो […]

हम सभी को ब्रह्मांडीय एकत्व भाव की ओर ही अग्रसर होना है. वह है- वसुधैव कुटुंबकम्. जीवन को सुगमता व शांति से झेलने के लिए सभी को कोई-ना-कोई या किसी-ना किसी आध्यात्मिक संबल की आवश्यकता होती ही है.
ऐसे में किसी को क्या अंतर पड़ता है, यदि वह सांई बाबा को पूजने से प्राप्त हो या किसी और ज्ञान देनेवाले गुरु स्वामी या शिक्षक को देव मान आशीर्वाद ग्रहण करने से. लोग सदा उसी को पूजते हैं, जो उनके मनोनुकूल हो. यह तो आवश्यकता और पूर्ति का विषय है.
आदरणीय शंकराचार्य या अन्य हिंदू धर्म के तथाकथित ठेकेदारों व संरक्षकों को भी लोग अवश्य ही मान देंगे, संपर्क करेंगे यदि उनसे कुछ संबल आधार व शांति प्राप्त हो. सभी धर्मों के रखवालों ने संपूर्ण मानवता हित के लिए क्या कल्याणकारी कर्म किया है?
इतने वेदों, उपनिषदों और धार्मिक ग्रंथों पर घंटों प्रवचनों व्याख्यानों व कथाओं का क्या लाभ? जबकि हिंसक घटनाओं व नारी के प्रति जघन्य कुकृत्यों में निरंतर वृद्धि और मानव से मानव के व्यवहार में तेजी से गिरावट आ रही है. हिंदू एक भौगोलिक संज्ञा है. यह किसी धर्म विशेष का नाम नहीं है, जैसा कि अधिकतर समझ लिया जाता है. सिंधु नदी के आसपास रहनेवाले व घाटी की सभ्यता का पालन करनेवाले, सभी पाश्चात्य लोगों द्वारा सिंधु कहलाये गये. बाद में इसी सिंधु का अपभ्रंश हिंदू हो गया.
हिंदू लोगों को प्रकृति से सामंजस्य रखनेवाला समझा जाता रहा. वह सभी अध्यात्म की ओर उन्मुख मानव रहे और उनके अनुभवों व अनुभूतियों से ही वेद शास्त्र प्रस्फुटित हुए. तो हिंदुत्व जीवन जीने की सत्यमयी व वास्तविक जीवन पद्धति है. सूर्य प्रकाशित होकर ऊष्मा व ऊर्जा प्रदान करता है, सदियों से यही कर रहा है. यही है सनातन है, शात है.
क्या किसी का उस पर एकाधिकार है? क्या कोई हिंदू या मुसलिम धार्मिक नेता उसे केवल अपना सिद्ध कर सकते हैं? जो शात है वह किसी धार्मिकता या संप्रदाय की पूंजी नहीं है. सूर्य रश्मियां सभी पर समान रूप से पड़ती हैं. वे प्रत्येक जीवधारी को, जात-पात, रंग, भेद-भाव से परे होकर ऊर्जान्वित व प्रकाशित करती हैं. वायु सबको अपनी प्राण शक्ति देती है. यही है इस प्रकृति का शात नियम.
– मीना ओउम्

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >