कृपण और क्षुद्र स्वभाव वालों काे जीवन में कभी आनंद या शांति प्राप्त नहीं होती. वे हमेशा ही परेशान रहते हैं, क्योंकि वे कंजूसी और लालची हो जाते हैं. जेब में सैकड़ों रुपयों के नोट होंगे, किंतु रेलवे स्टेशन पर कुली के साथ कुछ रुपयों के लिए निर्लज्जतापूर्वक आधे घंटे बहस करना उनका स्वभाव-सा हो जाता है. स्वयं स्वादिष्ट पदार्थ खायेंगे, लेकिन यदि नौकरों को उनका उपभोग करते हुए देख लें, तो उनका हृदया जलने लगता है.
अपने लिए अच्छी वस्तुएं चुन कर, बुरी वस्तुएं नौकरों के लिए छोड़ देना नीचता और कृपणता का ही द्योतक है. कंजूस लोगों का धन या तो उनके पुत्रों द्वारा हड़प लिया जाता है या फिर डॉक्टरों और वकीलों के बिल चुकाने में ही व्यय हो जाता है. धनसंपन्न होने पर भी वे जीवन में आनंद की अनुभूति नहीं कर पाते. वे अपनी धनराशि के भोक्ता नहीं, रखवाले मात्र होते हैं.
धन की रक्षा को सोचने में ही वे अपना अधिकतर समय व्यतीत कर देते हैं. यदि जीवन में ईश्वर-कृपा पाना चाहते हो, तो कृपणता और नीचता को अपने स्वभाव से पूर्णतया निष्कासित कर दो. उसके स्थान पर उदार, दानशील, त्यागमय बनने का प्रयास करो. तुम्हें सुख, सफलता और समृद्धि अवश्य प्राप्त होगी.
– स्वामी शिवानंद सरस्वती
