वर्तमान क्षण में अभी जागो! यह केवल एक बहता हुआ क्षण नहीं है. वर्तमान क्षण में अनंत की गहराई है. पूरा अतीत और भविष्य वर्तमान में मौजूद है. आपका पूरा कृत वर्तमान क्षण का पूर्ण रूप से अनुभव करना ही होना चाहिए. किसको परवाह है कि आप कैसा महसूस करते हो?
क्या आप वह कर रहे हो, जो आपको करना चाहिए? क्या आप अपने अस्तित्व के नाजुक पहलू से परिचित हो? क्या आप सब करते हुए भी अपने उस संवेदनशील पहलू में विश्राम कर रहे हो? वर्तमान क्षण संवेदनशील है. जब कोई संवेदनशील होता है, तो वह कमजोर पड़ जाता है. लेकिन, जब कोई ताकतवर होता है, तो असंवेदनशीलता झलकती है. दोनों का मेल उत्तम है- संवेदनशील होते हुए मजबूत और ताकतवर बने रहना.
यही ज्ञान है. भूतकाल के कर्मों का प्रभाव स्थायी नहीं है. भूतकाल में होनेवाली घटनाओं पर दुखी होना मूर्खता है. परिणाम का सामना करो पर वर्तमान में शांत रहो. अभी जागो! जब अभी जाग कर आप देखते हो, तो किसी परिणाम का भय भी नही रहता. जिस क्षण आपको अपनी गलती का एहसास हो जाता है, उसी क्षण आपको माफी मिल जाती है. आप हर क्षण में नये हो, फूल की तरह खिले हुए हो.
– श्री श्री रविशंकर
