अंतरबोध देता है ज्ञान

सूर्य प्राचीन है, पर आज भी सूर्य की किरणें ताजी हैं. वे पुरानी या बासी नहीं होती हैं. यही पानी के साथ भी है. गंगा नदी कितनी प्राचीन है, पर उसका पानी आज भी ताजा है. इसी प्रकार, ज्ञान वह है जो हमारे जीवन पर लागू होता है, जो प्राचीन है, फिर भी नवीन और […]

सूर्य प्राचीन है, पर आज भी सूर्य की किरणें ताजी हैं. वे पुरानी या बासी नहीं होती हैं. यही पानी के साथ भी है. गंगा नदी कितनी प्राचीन है, पर उसका पानी आज भी ताजा है. इसी प्रकार, ज्ञान वह है जो हमारे जीवन पर लागू होता है, जो प्राचीन है, फिर भी नवीन और ताजा है. ज्ञानी लोग नये और पुराने को जोड़ना और जीवन को जीना जानते हैं.

जैसे एक वृक्ष होता है, जिसके लिए जड़ें आवश्यक हैं, जो पुरानी हैं, और उसकी शाखाएं नयी हैं, वैसे ही जीवन भी अनुकूलनशील होना चाहिए, और यही प्राचीन ज्ञान है. कोई भी दुखी नहीं रहना चाहता. वह जो हमें दुख से दूर ले जाये, जो हमें दूरदर्शिता दे, जो जीवन को स्फूर्ति दे, और जो आपके व्यक्तिगत स्वरूप को सृष्टि से जोड़े, वही ज्ञान है. ज्ञान संतोष प्रदान करता है, जो छोटे परितोषण से नहीं मिलता. और यह सबको उपलब्ध है. इसका शिक्षा से कोई सरोकार नहीं है.

गांव के अनपढ़ लोगों में भी ज्ञानी मिल जायेंगे. वे जानते हैं अपना घर कैसे चलाना है, कैसे पड़ोस में मधुर संबंध बना कर रखने हैं, वे लोगों को जोड़ना जानते हैं. ज्ञान वह है, जो जीवन में उत्सव लाता है, चेहरे पर मुस्कान लाता है. वह जो आपको सेहतमंद रखे, जो आपको जीवन में दूरदर्शिता पाने का अंतर्बोध दे.

– श्री श्री रविशंकर

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