हमारे शरीर में अरबों-खरबों न्यूरॉन हैं, जीव कोशिकाएं हैं. ये न्यूरॉन हमारी अनेक प्रवृत्तियों का नियमन करते हैं. जो संकल्प न्यूरॉन तक पहुंच जाता है, वह सफल हो जाता है. न्यूरॉन बड़े-बड़े काम संपादित करते हैं. इनकी कार्य-प्रणाली को समझना बहुत ही कठिन है.अरबों-खरबों की संख्या में ये ज्ञान-तंतु हमारे मस्तिष्क में बिखरे पड़े हैं. इनका मन की शक्ति के जागरण में बहुत बड़ा उपयोग है.
प्राकृतिक चिकित्सक कहते हैं कि कोष्ठबद्धता हो तो पहले स्थिर बैठ कर ध्यानस्थ हो जाओ, ज्ञान-तंतु को सूचना दो कि पेट साफ हो रहा है और ज्ञान-तंतु वैसा ही आचरण करने लग जायेंगे. मानसिक विकास के क्षेत्र में स्वत:सूचन का बहुत बड़ा महत्व है. सम्मोहन की प्रक्रिया भी आश्चर्यकारी है. इसकी पृष्ठभूमि में ज्ञान-तंतुओं का ही चमत्कार है.
इन ज्ञान-तंतुओं में विचित्र क्षमताएं हैं, जिनकी हम कल्पना नहीं कर सकते. सम्मोहन की प्रयोग सूचना के आधार पर चलता है. सूचना के आधार पर शारीरिक अवयव भी उसी प्रकार काम करने लग जाते हैं. अपने-आप सूचना दें. पुराने को बदलने के लिए, नये को घटित करने के लिए उन तंतुओं के साथ आत्मीयता स्थापित करें. फिर जो चाहेंगे, वही घटित होने लगेगा.
– आचार्य महाप्रज्ञ
