नये साल का संकल्प

दूसरों का सहारा तकने की अपेक्षा हमें अपना सहारा तकना चाहिए, क्योंकि वे सभी साधन अपने भीतर प्रचुर मात्रा में भरे पड़े हैं, जो सुव्यवस्था और प्रगति के लिए आवश्यक हैं. यदि सूझ-बूझ की वस्तुस्थिति समझ सकने योग्य यथार्थवादी बनाने की साधना जारी रखी जाये, तो सबसे उत्तम परामर्शदाता सिद्ध हो सकती है. मस्तिष्क में […]

दूसरों का सहारा तकने की अपेक्षा हमें अपना सहारा तकना चाहिए, क्योंकि वे सभी साधन अपने भीतर प्रचुर मात्रा में भरे पड़े हैं, जो सुव्यवस्था और प्रगति के लिए आवश्यक हैं. यदि सूझ-बूझ की वस्तुस्थिति समझ सकने योग्य यथार्थवादी बनाने की साधना जारी रखी जाये, तो सबसे उत्तम परामर्शदाता सिद्ध हो सकती है.

मस्तिष्क में वह क्षमता मौजूद है, जिसे थोड़ा-सा सहारा देकर उच्च कोटि के विद्वान कहलाने का अवसर मिल जाये. हाथों की संरचना अद्भुत है. यदि उन्हें सही से उपयुक्त काम करने के लिए सधाया जा सके, तो वे अपने कर्तृत्व से संसार को चमत्कृत कर सकते हैं. मनुष्य का पसीना इतना बहुमूल्य खाद है, जिससे हीरे-मोतियों की फसल उगायी जा सकती है.

दूसरों का सहारा इसलिए तकना पड़ता है कि हम अपने को न तो पहचान सके और न अपनी क्षमताओं को सही रीति से प्रयुक्त करने की कुशलता प्राप्त कर सके. आलस्य ने ही हमें इस स्थिति में रखा है कि आत्मविश्वास करते न बन पड़े और दूसरों का सहारा ताकना पड़े. यदि आत्मावलंबन की ओर मुड़ पड़ें, तो फिर परावलंबन की कोई आवश्यकता ही नहीं होगी. नये साल में यह संकल्प लें कि आप आत्मावलंबी बनेंगे.

– पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >