यदि हम अस्वस्थ हैं, तो हम मनमाने ढंग से या अपने किसी मित्र की सलाह से कोई औषधि नहीं ले सकते. किसी औषधि का सेवन लिखे हुए निर्देशों या कुशल चिकित्सक के आदेश के अनुसार ही करना होता है. इसी प्रकार भगवद्गीता को इसके वक्ता द्वारा दिये गये निर्देशानुसार ही ग्रहण या स्वीकार करना चाहिए. भगवद्गीता के वक्ता भगवान श्रीकृष्ण हैं.
भगवद्गीता के प्रत्येक पृष्ठ पर उनका उल्लेख भगवान के रूप में हुआ है. निस्संदेह भगवान शब्द कभी-कभी किसी भी अत्यंत शक्तिशाली व्यक्ति या किसी शक्तिशाली देवता के लिए प्रयुक्त होता है. और यहां पर भगवान शब्द निश्चित रूप से भगवान श्रीकृष्ण को एक महान पुरुष के रूप में सूचित करता है. किंतु, साथ ही हमें यह जानना होगा कि भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं. जैसा कि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, माधवाचार्य, चैतन्य महाप्रभु तथा भारत के वैदिक ज्ञान के अन्य विद्वान आचार्यों ने पुष्टि की है. भगवान ने भी स्वयं भगवद्गीता में अपने को परम पुरुषोत्तम भगवान कहा है और ब्रह्म संहिता में तथा अन्य पुराणों में विशेषतया श्रीमद्भागवतम् में, जो भागवतपुराण के नाम से विख्यात है, वे इसी रूप में स्वीकार किये गये हैं.
– स्वामी प्रभुपाद
