हमने नियति को मिलने का एक वचन दिया था, और अब समय आ गया है कि हम अपने वचन को निभाएं. इतिहास के आरंभ के साथ ही भारत ने अपनी अंतहीन खोज प्रारंभ की, और ना जाने कितनी ही सदियां इसकी भव्य सफलताओं और असफलताओं से भरी हुई हैं. भारत ने कभी इस खोज से अपनी दृष्टि नहीं हटाई और कभी भी अपने उन आदर्शों को नहीं भूला, जिसने इसे शक्ति दी.
आज हम दुर्भाग्य के एक युग का अंत कर रहे हैं और भारत पुनः खुद को खोज पा रहा है. आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वह महज एक कदम है, नये अवसरों के खुलने का. इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं. हमें चैन से नहीं बैठना है, बल्कि निरंतर प्रयास करना है, ताकि हम जो वचन बार-बार दोहराते रहे हैं, उसे पूरा कर सकें. भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ित लोगों की सेवा करना.
इसका मतलब है गरीबी और अज्ञानता को मिटाना, बिमारियों और अवसर की असमानता को मिटाना. हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति महात्मा गांधी की यही महत्वाकांक्षा रही है कि हर एक आंख से आंसू मिट जायें. जब तक वे पीड़ित हैं, तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा.
– पंडित जवाहरलाल नेहरू
