आदर्श पाने का यत्न करो

आदर्श बहुत से हैं. मुझे कोई अधिकार नहीं कि मैं आपको बताऊं कि आपका आदर्श क्या होना चाहिए, या कि आपके गले जबरदस्ती कोई आदर्श मढ़ दूं मेरा तो यह कर्तव्य होगा कि आपके सम्मुख मैं इन विभिन्न आदर्शों को रख दूं, और आपको अपनी प्रकृति के अनुसार जो आदर्श सबसे अधिक अनुकूल जंचे, उसे […]

आदर्श बहुत से हैं. मुझे कोई अधिकार नहीं कि मैं आपको बताऊं कि आपका आदर्श क्या होना चाहिए, या कि आपके गले जबरदस्ती कोई आदर्श मढ़ दूं मेरा तो यह कर्तव्य होगा कि आपके सम्मुख मैं इन विभिन्न आदर्शों को रख दूं, और आपको अपनी प्रकृति के अनुसार जो आदर्श सबसे अधिक अनुकूल जंचे, उसे ही आप ग्रहण करें और उसी ओर अनवरत प्रयत्न करें.
वही आपका इष्ट है, वही आपका विशेष आदर्श है. प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि वह अपना आदर्श लेकर उसे चरितार्थ करने का प्रयत्न करे. दूसराें के ऐसे आदर्शों को लेकर चलने की अपेक्षा- जिनको वह पूरा ही नहीं कर सकता- अपने ही आदर्श का अनुसरण करना सफलता का अधिक निश्चित मार्ग है.
उदाहरणार्थ, यदि हम एक छोटे बच्चे से एकदम बीस मील चलने को कह दें, तो या तो वह बेचारा मर जायेगा या यदि हजार में से एकाध रेंगता-रेंगता कहीं पहुंचा भी तो वह अधमरा हो जायेगा. किसी समाज के सब स्त्री-पुरुष न एक मन के होते हैं, न एक ही योग्यता के और न एक ही शक्ति के. अतएव, उनमें से एक का भी उपहास करने का हमें कोई अधिकार नहीं है. अपने आदर्श को प्राप्त करने के लिए जितना हो सके, यत्न करो.
– स्वामी विवेकानंद

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