जीवन का आनंद प्रार्थना

प्रार्थनाएं जरूर परिणाम लाती हैं, मगर तभी जब परिणाम की कोई आकांक्षा नहीं होती. यह विरोधाभास तुम्हें समझाना ही होगा. यह धर्म की अंतरंग घटना है. जिसने मांगा, वह खाली रह गया. जिसने नहीं मांगा, वह भर गया. प्रार्थना हमें सिखाई ही गयी हैं मांगने के लिए. जब मांगना होता है कुछ, तभी लोग प्रार्थना […]

प्रार्थनाएं जरूर परिणाम लाती हैं, मगर तभी जब परिणाम की कोई आकांक्षा नहीं होती. यह विरोधाभास तुम्हें समझाना ही होगा. यह धर्म की अंतरंग घटना है. जिसने मांगा, वह खाली रह गया. जिसने नहीं मांगा, वह भर गया. प्रार्थना हमें सिखाई ही गयी हैं मांगने के लिए. जब मांगना होता है कुछ, तभी लोग प्रार्थना करते हैं, नहीं तो कौन प्रार्थना करता है?
लोग दुख में याद करते हैं परमात्मा को, सुख में कौन याद करता है? मगर सुख में याद करने का मतलब यही होता है कि अब कोई आकांक्षा नहीं होगी. सुख तो है ही, अब मांगना क्या है? जब सुख में कोई प्रार्थना करता है तो प्रार्थना केवल धन्यवाद होती है. सम्राट से मिलने चले हो, तो सम्राट की तरह चलो. सम्राट की चाल क्या है? न कोई वासना है, न आकांक्षा है; जीवन का आनंद है. जो दिया है, वह इतना है. और क्या मांगना है? बिना मांगे इतना दिया है.
एक गहन कृतज्ञता का भाव ही प्रार्थना है. मगर प्रार्थना पूरी नहीं होती तो शक होने लगता है परमात्मा पर. प्रार्थना पर शक नहीं होता-कि मेरी प्रार्थना में कोई गलती तो नहीं हो रही? परमात्मा पर शक होने लगता है. नाव ठीक नहीं चलती तो मेरी पतवारें गलत तो नहीं हैं? दूसरा किनारा है या नहीं, इस पर शक होने लगता है.
– आचार्य रजनीश ओशो

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >