हिल-मिल का सिद्धांत

व्यवहार-कुशलता या मिल-जुल कर रहना एक महान गुण है. इसे जीवन की कला का नाम दिया जाये, तो अनुचित नहीं होगा. व्यक्ति जिस समाज और जिस अवस्थाम रहने को बाध्य हो, वहां अनेक बाधाओं के बावजूद भी निर्भीक और सफल बन कर रहे. यदि तुम्हें अनुकूल परिस्थितियों में रह कर सफलता मिली भी तो क्या […]

व्यवहार-कुशलता या मिल-जुल कर रहना एक महान गुण है. इसे जीवन की कला का नाम दिया जाये, तो अनुचित नहीं होगा. व्यक्ति जिस समाज और जिस अवस्थाम रहने को बाध्य हो, वहां अनेक बाधाओं के बावजूद भी निर्भीक और सफल बन कर रहे. यदि तुम्हें अनुकूल परिस्थितियों में रह कर सफलता मिली भी तो क्या बड़ी बात है? प्रतिकूल परिस्थितियों में रहते हुए भी प्रत्येक व्यवहार को उचित रीति से करना व्यवहार-कुशलता है.

व्यवहार कुशल व्यक्ति दूसरे व्यक्तियों के साथ हिल-मिल जाता है, चाहे उन लोगों की आदतें कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों. हिल-मिल कर रहने की कला दूसरों के दिलों पर अपना अमिट प्रभाव अंकित कर देती है. हिल-मिल कर रहनेवाला व्यक्ति समय आने पर थोड़ा झुक कर चलता है, थोड़ा नम्र बन जाता है, थोड़ा मृदुभाषी बन जाता है और इस प्रकार जीवन-संग्राम में निश्चित विजय प्राप्त कर लेता है.

आज अधिकतर लोग दूसरों के साथ हिल-मिल कर रहना नहीं जानते. सारा संसार हिल-मिल के सिद्धांत के अनुसार ही चल रहा है. इसलिए जो व्यक्ति हिल-मिल कर रहना जानता है, वह इस भाग-दौड़ भरी दुनिया में आनंद से जीवन बिता सकता है.À स्वामी शिवानंद सरस्वती

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