कर्म अति महत्वपूर्ण

मैं सर्वदा अपने भाइयों और बहनों को परामर्श देता हूं कि प्रार्थना से कर्म अधिक महत्वपूर्ण है. हमें उद्यम करना चाहिए. कभी-कभी मैं सोचता हूं कि संवेदना से संबंधित मेरी बातें हृदय में नहीं उतरती हैं. मैं उन व्यक्तियों और संस्थाओं की सचमुच प्रशंसा करता हूं जो निर्धनों की सहायता करते हैं और उनकी शिक्षा […]

मैं सर्वदा अपने भाइयों और बहनों को परामर्श देता हूं कि प्रार्थना से कर्म अधिक महत्वपूर्ण है. हमें उद्यम करना चाहिए. कभी-कभी मैं सोचता हूं कि संवेदना से संबंधित मेरी बातें हृदय में नहीं उतरती हैं.
मैं उन व्यक्तियों और संस्थाओं की सचमुच प्रशंसा करता हूं जो निर्धनों की सहायता करते हैं और उनकी शिक्षा आदि के कई क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं. ये लोग संवेदना को व्यावहारिक स्तर पर कार्यान्वित कर रहे हैं. मैं यहां एक सुखद नरम गद्दी पर बैठ कर संवेदना की बात कर रहा हूं, यह कदाचित मिथ्याचार है.
कर्म अति महत्वपूर्ण है. किसी कर्म को बिना थके कार्यान्वित करने के लिए हमें दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है. अपने लक्ष्य के बारे में हमारी स्पष्ट दृष्टि होनी चाहिए. इससे काम को सहजता और बिना थके निपटाना संभव होगा. यदि लक्ष्य सुस्पष्ट नहीं है या उसमें दुरूहता है, तो उसके निष्पादन में वैसे ही तरीके अपनाने होंगे तथा उससे और अधिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी.
इन जटिल दार्शनिक अवधारणाओं के परिणामस्वरूप हमारे जीवन में भटकाव नहीं आना चाहिए. इसके विपरीत, इन दार्शनिक विचारों के अध्ययन से हमारे सम्मुख जीवन का स्पष्ट चित्र आ जाता है. ऐसा होने पर हमारी कार्य-योजना स्पष्ट हो जाती है. अंत में कर्म करते रहने के साथ-साथ हमारा लक्ष्य मन को जाग्रत करना है.
दलाई लामा

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