जो निष्क्रिय है उसे किसी चीज कि जरूरत नहीं होती और न ही उसकी कोई जिम्मेवारी होती है. इसके साथ वह व्यक्ति जो पूरी तरह से प्रबुद्ध है, उसे किसी चीज की आवश्यकता नहीं होती और न ही वह कोई जिम्मेवारी समझता है.
इन दो प्रकार के लोगों के अतरिक्त सभी लोगों कि कुछ जरूरतें और जिम्मेवारियां होती हैं. अब प्रश्न यह है कि आप अपने जिम्मेवारियों और जरूरतों को कैसे पूरा करते हो? यदि आप अपनी जिम्मेवारियों पर अधिक ध्यान देते हो, तो आप कि जरूरतों का ख्याल रखा जाता है. यदि आपकी जरूरतें ज्यादा होंगी और आप केवल उन्हीं पर ध्यान देते हैं, तो आपकी जिम्मेवारियां नजरअंदाज हो जाती हैं. यह उदासीनता का मार्ग है.
जब हम जिम्मेवारियों को नहीं समझते, तो शिकायत करते है और खुश नहीं रहते. यदि आप जिम्मेवारी समझते हो और आपकी जरूरतें भी ज्यादा नहीं होती, तो आप उत्साहपूर्ण और खुश रहते हो. आपके जीवन में एक ऐसा समय आता है, जब आप अपनी जरूरतों और जिम्मेवारियों का समर्पण कर देते हैं, परंतु उस स्थिति तक जाने के लिए कई स्तरों से गुजरना पड़ता है.
जैसे कि यदि कोई भूखा है, तो उसे भोजन करना पड़ेगा. ऐसी जरूरतें शरीर से संबंधित हैं. आपका शरीर इस समाज और दुनिया के लिए है. यह दुनिया/समाज इसका ख्याल भी रखेगा. आप ईश्वर के हो और ईश्वर ही आप का ख्याल रखेगा.
श्री श्री रविशंकर
