गीता में लिखा है, कोई शरीर धारी अपनी सारी क्रियाएं छोड़ दे, यह संभव नहीं है. तब प्रश्न होता है कि आदमी सबसे अधिक कौन-सी क्रिया करता है? वह सबसे अधिक सोचने की क्रिया करता है. सोचना एक ऐसी क्रिया है, जो हर क्रिया के साथ जुड़ी रह सकती है. व्यक्ति चलते समय सोचता है. खाते समय विचारों के उपवन में घूमता है. यहां तक कि नींद में भी चिंतन मुक्त नहीं रहता.
एक बार किसी जिज्ञासु ने एक दार्शनिक से चार प्रश्न पूछे. इस जगत में सबसे बड़ा कौन है? उत्तर मिला-आकाश. संसार में सबसे आसान काम क्या है? उत्तर-बिना मांगी सलाह देना. दुनिया में सबसे कठिन काम क्या है? उत्तर-खुद को पहचान पाना. और अंतिम प्रश्न था- दुनिया में सबसे अधिक गतिशील क्या है? उत्तर मिला- विचार. विचार सबसे अधिक गतिशील होता है. प्रकाश की गति एक सेकेंड में 9 लाख 86 हजार मील मानी गयी है, किंतु मन की गति इससे भी तेज है. वह एक क्षण में कहीं-का-कहीं पहुंच जाता है.
एक व्यक्ति ने अपने साथी से पूछा, मित्र! मैं अमेरिका जाने की सोच रहा हूं। तुम्हारी दृष्टि से कितना समय लगेगा? दोस्त ने कहा, कुछ भी नहीं लगेगा. समय तो जाने में लगता है, सोचने में नहीं. सोचने का सिलसिला निरंतर चलता है. मन किसी एक आलंबन पर स्थिर नहीं रहता. वह चंचल है, व्यग्र है, विचरणशील है. इसलिए सामान्यतया वह पकड़ में नहीं आता.
आचार्य महाश्रमण
