बुद्ध पूर्णिमा 4 मई को

बैसाख की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी. इस वर्ष यह पर्व अंगरेजी तिथि के अनुसार 4 मई, सोमवार को है. बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार पूरे […]

बैसाख की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी. इस वर्ष यह पर्व अंगरेजी तिथि के अनुसार 4 मई, सोमवार को है. बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है, मगर बोधगया और सारनाथ में अलग ही हर्षोल्लास रहता है. दुनियाभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी यहां आते हैं और प्रार्थनाएं करते हैं.
हिंदू धर्मावलंबियों के लिए बुद्ध भगवान विष्णु के नौवें अवतार हैं, अत: हिंदुओं के लिए भी यह दिन पवित्र माना जाता है. दोनों ही धर्मों के लोग बुद्ध पूर्णिमा को श्रद्धा के साथ मनाते हैं. इस दिन लोग व्रत-उपवास रखते हैं. बौद्ध मतावलंबी श्वेत वस्त्र धारण करते हैं तथा बौद्ध विहारों व मठों में एकत्रित होकर सामूहिक उपासना करते हैं व दान दिया जाता है.
वैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा श्री हरि विष्णु भगवान को समर्पित होती है. शास्त्रों में पूर्णिमा के दिन तीर्थस्थलों में गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. बैशाख पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि इस पूर्णिमा को भाष्कर देव अपनी उच्च राशि मेष में होते हैं, चंद्रमा भी उच्च राशि तुला में. शास्त्रों में पूरे बैशाख में गंगा स्नान का महत्व बताया गया है, जिसमें पूर्णिमा स्नान सबसे फलदायी है.

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