शारदीय नवरात्र : इन्‍होंने ने ही दिया था महालया को स्वर...

आशीष कुंदन शारदीय नवरात्र की चर्चा के साथ ही जो शब्द सबसे पहले मन में आती है, वह है महालया. वर्षों से सुबह-सबेरे रेडियो से निकलती वह आवाज जागो दुर्गा जागो, तुमि जागो… एक नये उत्साह व उमंग का संचार कर देता है. यही नहीं पूजा के दौरान लगभग सभी पंडालों में उनकी ओजस्वी आवाज […]

आशीष कुंदन
शारदीय नवरात्र की चर्चा के साथ ही जो शब्द सबसे पहले मन में आती है, वह है महालया. वर्षों से सुबह-सबेरे रेडियो से निकलती वह आवाज जागो दुर्गा जागो, तुमि जागो… एक नये उत्साह व उमंग का संचार कर देता है.
यही नहीं पूजा के दौरान लगभग सभी पंडालों में उनकी ओजस्वी आवाज गूंजती सुनायी दे देगी. आपने भी यह आवाज जरूर सुनी होगी. आकाशवाणी, कोलकाता से प्रसारित महालया से देशभर में ख्याति अर्जित करनेवाले द्विजेन मुखर्जी उर्फ द्विजेन मुखोपाध्याय कभी देवघर जिले के मधुपुर में रहा करते थे. मधुपुर का प्रसिद्ध शांति निवास उनका आशियाना हुआ करता था. कमाल की बात है कि आज भी मधुपुर की माटी से उनका जुड़ाव बना हुआ है. मधुपुर में उन्हें सब प्यार से द्विजेन दा ही कहते हैं.
बिक गया द्विजेन दा का आशियाना शांति निवास
द्विजेन दा फिलहाल कोलकाता के साल्ट लेक में रहते हैं. वर्ष 1942 के आसपास मधुपुर में रहा करते थे. 1995 तक यहां बावनबीघा मुहल्ले में उनका आवास शांति निवास रहा. अब वह कोठी बावनगामा के कमल नयन सिंह के स्वामित्व में है. कोठी बिक जाने के बावजूद वे अपनी इकलौती पुत्री व दामाद के साथ हर साल मधुपुर पहुंचते हैं. इस दौरान बेटी-दामाद के साथ वे करीब एक सप्ताह तक विवेकानंद कपिल मठ में रहते हैं. कमल नयन सिंह बताते हैं कि वह शांति निवास भी आते हैं.
उनके महालया गीत का नहीं है कोई विकल्प
द्विजेन मुखर्जी से गायकी के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करनेवाले उनके परम शिष्य मधुपुर के मीना बाजार निवासी सुशांत मित्रा बताते हैं कि 25-30 साल पहले गुरुजी से सीखने के बाद हेमंत कुमार की आवाज में वे गाना गा लेते हैं.
कई बार गुरुजी के साथ मंच भी साझा करने का अवसर मिला. मधुपुर आने के पहले वे उन्हें फाेन कर सूचना देते हैं. यहां आने के बाद उन्हीं के साथ अधिकांश समय बीतता है. आज भी गुरुजी के महालया गीत का विकल्प किसी गायक के पास नहीं है.
एचएमवी वालों से करायेंगे कोठी में शूटिंग
शांति निवास के वर्तमान मालिक कमल नयन सिंह भी यह जान कर हतप्रभ रह गये थे. उनका कहना है कि उन्हें पता ही नहीं था कि उन्होंने इतने बड़े व्यक्ति की कोठी खरीदी है. किसी परिचित के माध्यम उन्होंने उस कोठी को वर्ष 1995 में खरीदी और उसके भीतर मरम्मत करा कर रह रहे हैं.
कुछ दिनों बाद मधुपुर में आयोजित स्काउट गाइड के कार्यक्रम में द्विजेन दा के कुछ शिष्य पहुंचे थे. वे लोग शांति निवास कोठी पहुंचे, तब जाकर उन्हें पता चला कि वह खुशकिस्मत हैं कि ऐसे घर में रहते हैं.
कमल नयन बताते हैं कि अपने शिष्यों से जानकारी मिलने के बाद द्विजेन दादा दिसंबर से जनवरी के बीच हर वर्ष अपने बेटी व दामाद के साथ मधुपुर आने लगे हैं. उनके अनुसार, द्विजेन दा ने कहा है कि एचएमवी वालों को लाकर वे शांति निवास कोठी की शूटिंग भी करायेंगे.

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