कण-कण में कृष्ण हो

Shri Krishna Janmashtami के शुभ अवसर पर पढ़ें, कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण पर कवि शशांक भारद्वाज द्वारा लिखी गई कविता.

कृष्ण हो
सम्पूर्ण हो
प्रकांड हो
ब्रह्मांड हो
कण कण हो
जन जन हो
विस्तार हो
आधार हो
कृपाअपार हो
पालनहार हो
दिव्य हो
भव्य हो
दृष्टि हो
श्रृष्टि हो
व्योम हो
सोम हो
संस्कार हो
उपहार हो
तरुवर हो
गुरुवर हो
प्रसाद हो
आशीर्वाद हो
मधुर हो
प्रचुर हो
प्रेम में हो
रोम में हो
कृत्य में हो
नृत्य में हो
राग हो
त्याग हो
बांसुरी हो
सुदर्शन हो
धन हो
रण हो
चित्र हो
मित्र हो
मेधा हो
श्रद्धा हो
अनंत हो
अनन्य हो
कृष्ण हो
सम्पूर्ण हो
– शशांक भारद्वाज

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