Mother’s Day : पन्ना धाय, जिनके त्याग की कहानी सुन भर जाएंगी आंखें

Mother’s Day : मां, जिसके आंचल में सुकून है, मदर्स डे उन्हीं मांओं को समर्पित दिन है. हालांकि भारतीय संस्कृति में हर दिन मां का होता है, क्योंकि उसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं. मां जो अपने हाथों से हमें खिलाती है, हमारे हर नखरे सहती है, लेकिन कभी थकती नहीं,फिर चाहे वह 25 की उम्र की हो या 75 की. मां, त्याग की मूर्ति भी होती है, ऐसी ही एक मां पन्ना धाय के त्याग की कहानी यहां पढ़ें.

Mother’s Day : मदर्स डे का आयोजन इस बार तब हो रहा है जब हमारी मातृभूमि पर दुश्मन ने बुरी नजर डाली है. भारतीय संस्कृति में माता और मातृभूमि को सर्वोपरि माना गया है, तब ही तो कहा जाता है-‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और भारत माता के सपूत अपनी मां की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात हैं. देश में कई ऐसे सपूत हुए, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलि दी. मदर्स डे के मौके पर हम आज याद करेंगे, उस माता को जिसने मातृभूमि के लिए अद्‌भुत बलिदान दिया था. उस वीरांगना का नाम था पन्ना धाय.

कौन थी पन्ना धाय

14वीं शताब्दी में पन्ना धाय का जन्म मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ में हुआ था. वह मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह के बेटे उदय सिंह की धाय मां थी. धाय मां उस स्त्री को कहते हैं, जो अपना दूध किसी बच्चे को पिलाती है. पन्ना धाय ने राजकुमार उदय सिंह को अपना दूध पिलाया था और उसकी देखभाल करती थी. पन्ना धाय के बारे में यह कहा जाता है कि वह गुर्जर जाति की महिला थी, जिसने अपना सर्वस्व देश के लिए कुर्बान कर दिया था.

पन्ना धाय के त्याग की कहानी

पन्ना धाय की कहानी

पन्ना धाय राजकुमार उदय सिंह की धाय मां थी. पन्ना का पुत्र भी उदय सिंह की ही उम्र का था. इसी वजह से पन्ना धाय ने राजकुमार उदय सिंह को अपना दूध पिलाया था और उसका लालन-पालन अपने पुत्र की तरह ही करती थीं. राणा सांगा के भाई पृथ्वीराज की दासी का एक पुत्र था बनवीर. उसके मन में राज सिंहासन को लेकर लालच जाग गया था, इसी वजह से उसने राणा सांगा के पुत्रों को मारकर सत्ता पर कब्जा करने का सोचा था. इसी धुन में उसने उदय सिंह को मारने की भी योजना बनाई थी, क्योंकि उदय सिंह सिंहासन के उत्तराधिकारी थे. पन्ना धाय को जब इस बारे में पता चला, तो उसने राज्य के उत्तराधिकारी को बचाने के लिए अद्‌भुत त्याग किया. पन्ना धाय ने राजकुमार उदय सिंह को एक टोकरी में लिटाकर पत्तों से ढंक कर बाहर कर दिया और अपने बेटे चंदन को जो उसी उम्र का था उदय सिंह की जगह पर लिटा दिया. जब बनवीर उदय सिंह के कमरे में आया और उसके बारे में पूछा, तो पन्ना धाय ने बिस्तर पर लेटे हुए अपने बेटे की ओर इशारा कर दिया. बनवीर ने बिना कुछ सोचे, छोटे से बच्चे को तलवार से काट दिया. पन्ना धाय का अपना बच्चा उसके सामने मारा गया, लेकिन पन्ना धाय ने उफ्फ तक नहीं की. पन्ना धाय के त्याग की वजह से ही मेवाड़ के उत्तराधिकारी उदय सिंह की जान बची थी. पन्ना धाय के त्याग ने मेवाड़ के उत्तराधिकारी की रक्षा की और आगे चलकर उदय सिंह मेवाड़ के राजा बने और उदयपुर की स्थापना की.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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