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देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

समूचे घाट की आकर्षक सजावट के साथ ही मां गंगा की 108 किलो की अष्टधातु की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार 108 किलो फूल से किया गया, जिसमें कोलकाता से मंगाए 70  किलो विदेशी संग देशी फूलों का भी समावेश रहा.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Varanasi
Updated Date
देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

Varanasi Dev Deepawali 2021: काशी में देव दीपावली पर शुक्रवार को दशाश्वमेध घाट की गंगोत्री सेवा समिति ने पहली बार पांच बेटियों की अगुआई में गंगा महाआरती संपन्न कराई. गंगा घाट पर नारी शक्ति के सम्मान को बढ़ाते हुए पांच कन्यायों ने महाआरती को संपन्न किया.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

हर साल की भांति दशाश्वमेध घाट पर नियमित आरती करने वाली संस्था गंगोत्री सेवा समिति ने मां गंगा की पूजा-अर्चना करने के बाद दुग्धाभिषेक करके तट पर सिंहासनारूढ़ गंगा महारानी की श्रृंगारिक प्रतिमा की अलौकिक आरती की. असंख्य दीपों से जगमग गंगा तट की अलौकिक शोभा श्रद्धालु निहारते रहे. इस दौरान हर-हर महादेव की गूंज से काशी देवताओं की उपस्थिति को प्रतिबिंबित कर रही थी.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

यह परंपरा कार्तिक पूर्णिमा के दिन दशाश्वमेघ घाट स्थित गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में 30 साल से बाबू महाराज के परिवार से शुरू की गई. देव दीपावली के अवसर पर शामिल होने वाली महाआरती में तीसरी पीढ़ी की मान्या, पद्माक्षी, रोशनी, पूजा और करिश्मा ने आरती करके नारी शक्ति का परिचय देते हुए बेटियों का हौसला बढ़ाया.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

साल 1991 के बाद परिवार की तीसरी पीढ़ी की बेटियां थी, जिन्होंने माता गंगा की महाआरती की. कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली मनाए जाने के उपलक्ष्य में गंगा घाट पर भव्य जल उत्सव दीपकों की सजावट के साथ मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार महादेव के दैत्य त्रिपुर के वध के उपरांत देवताओं ने दीप श्रृंखला जलाकर दीपावली उत्सव मनाई थी. यही कारण है कि आज के दिन मंदिरों में दीपक जलाकर उत्सव मनाया जाता है.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

कार्तिक पूर्णिमा पर दशाश्वमेध घाट पर नियमित आरती करने वाली संस्था गंगोत्री सेवा समिति ने गंगा महारानी का पूजन-स्तवन कर दुग्धाभिषेक किया. काशी के घाट ब्राह्मणों के श्लोक के साथ हर-हर गंगे के महाजाप से गूंज उठा.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान का श्रीगणेश मंगलाचरण से हुआ. इसके पश्चात समिति के संस्थापक अध्यक्ष किशोरी रमण दूबे ऊर्फ बाबू महाराज के सान्निध्य में मुख्य अतिथि सुमेरूपीठ शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सस्वती, पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह, इंडियन ऑयल के डॉ. उत्तीय भटाचार्य, अरुण प्रयास, कमलेश कुमार राय, चंद्रिका राय, यूको बैंक से धनश्याम परमार, सिडवी के नितिन जालान और डॉ. रितु गर्ग ने मां गंगा का शास्त्रोक्त विधि से पूजन के क्रम में 51 लीटर दूध से अभिषेक किया.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

समूचे घाट की आकर्षक सजावट के साथ ही मां गंगा की 108 किलो की अष्टधातु की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार 108 किलो फूल से किया गया, जिसमें कोलकाता से मंगाए 70  किलो विदेशी संग देशी फूलों का भी समावेश रहा. इसी क्रम में पांच बेटियों के नेतृत्व में मां गंगा की महाआरती के साक्षी हजारों श्रद्धालुओं ने बेटियों के जन्म में सहायक और उनके सम्मान का संकल्प दुहराया.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

इस वर्ष के आयोजन में 21 बटुकों संग 42 रिद्धि-सिद्धि ने गंगा महाआरती की. इस उत्सव को यादगार बनाने के लिए कन्हैया दुबे के संयोजन में हुए सांस्कृतिक आयोजन में गायक और सांसद मनोज तिवारी, काशी के मशहूर गायक ओम तिवारी, आस्था शुक्ला और अमलेश शुक्ला संग तमाम गायकों ने गीतों से अपनी स्वरांजलि अर्पित की.

देव दीपावली पर वाराणसी के गंगा घाट से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प, सालों पुरानी परंपरा रही कायम

गंगोत्री सेवा समिति ने केदार घाट की सीढ़ियों पर आकर्षक सजावट और पांच आरती संपन्न कराई. आयोजन के अंत में राज्य पुलिस और पीएसी के शहीद जवानों की याद में अश्विन पूर्णिमा (20 अक्टूबर) से जल रही आकाशदीप का समापन करते हुए उनके नाम से दीपदान किया गया. महाआयोजन में प्रमुख रूप से पं. किशोरी रमन दुबे बाबू महाराज, दिनेश शंकर दुबे, गंगेश्वर दुबे, डॉ. संतोष ओझा, भृगु नाथ द्विवेदी ,संकठा प्रसाद ने भागीदारी की और संचालन राजेश शुक्ला ने निभाई.

(रिपोर्ट:- विपिन सिंह, वाराणसी)

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